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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 20, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सिस्टम शर्मसार.... PGI में दवाई के लिए पैसे नहीं थे, जुड़वा बच्चों को लेकर लुधियाना लौटा पिता

By Vikas_KumarEdited By:
Published: Sat, 20 Feb 2021 09:50 AM (IST)Updated: Sat, 20 Feb 2021 11:05 AM (IST)

सिविल अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड विभाग के बाहर पार्क में वीरवार शाम को धूरी लाइन के पास रहने वाली ...और पढ़ें

सिविल अस्तपाल लुधियाना के मदर एंड चाइल्ड विभाग से दोनों नवजात को सीएमसी लेकर जाता पिता संतोष कुमार।
सिविल अस्तपाल लुधियाना के मदर एंड चाइल्ड विभाग से दोनों नवजात को सीएमसी लेकर जाता पिता संतोष कुमार।

लुधियाना, जेएनएन। सिविल अस्पताल के पार्क में वीरवार को पत्नी की डिलीवरी होने और फिर जुड़वा नवजात को पीजीआइ रेफर किए जाने के बाद पिता संतोष कुमार व्यवस्था के आगे बेबस नजर आया। पीजीआइ में बच्चों का इलाज करवाने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे इसलिए वह गंभीर हालत में ही दोनों नवजात और पत्नी को बस से वापस लुधियाना लौट आया। सिविल अस्पताल लुधियाना के मदर एंड चाइल्ड विभाग के लेबर रूम के स्टाफ की संवेदनहीनता ने शुक्रवार को पूरे सिस्टम को शर्मसार कर दिया।

हालात के हाथों मजबूर पिता जैसे ही लौटकर सिविल अस्पताल पहुंचा तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रबंधन ने दोनों नवजात और उनकी मां तो सीएमसी अस्पताल रेफर कर दिया। रेफर करने के चक्कर में दोनों नवजात की हालत गंभीर बनी हुई है। गनीमत यह रही कि चारों ओर फजीहत होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बच्चों और उनकी मां का इलाज सरकार के खर्च पर करवाने की हामी भर दी जिससे उम्मीद बंधी है।

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गौरतलब है कि सिविल अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड विभाग के बाहर पार्क में वीरवार शाम को धूरी लाइन के पास रहने वाली साढ़े छह माह की गर्भवती उमा देवी ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। लेबर रूम का स्टाफ बार-बार बुलाने पर भी उनकी मदद के लिए नहीं आया था। पार्क में बैठी कुछ महिलाओं ने पर्दा कर महिला की डिलीवरी करवाई थी। प्री मेच्योर डिलीवरी के कारण बच्चों की तबीयत खराब होने पर अस्पताल प्रबंधन ने बच्चों और उनकी मां को पीजीआइ चंडीगढ़ रेफर कर दिया था। उन्हें वहां भर्ती कर लिया गया। कुछ दवाइयां पीजीआइ से उन्हें मिल गईं और कुछ पर्ची पर लिख दी गईं। बच्चों के पिता के पास यह दवाइयां खरीदने के लिए पैसे नहीं थे।

पीजीआइ में दवाइयां नहीं मिली

संतोष कुमार ने बताया कि पीजीआइ में आग्रह करने के बावजूद भी उसे दवाइयां नहीं मिली। अस्पताल स्टाफ से आग्रह किया कि वे रातभर उनके बच्चों का इलाज कर दें। सुबह होने के बाद भी वह पैसों का प्रबंध नहीं कर पाया। बेबस होकर उसने मेडिकल एडवाइजरी के विरुद्ध जाकर बच्चों की छुट्टी करवाई। इसके बाद उन्हें गोद में लेकर बस से वापस लुधियाना आ गया। बस स्टैंड से आटो में बैठकर फिर सिविल अस्पताल पहुंचा। इमरजेंसी में पहुंचने पर दोनों नवजात की हालत खराब थी। उन्हें तत्काल स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में रखा गया। दोनों की हालत में कोई सुधार नहीं होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें सीएमसी रेफर कर दिया।

जांच कमेटी तीन दिन में सौंपेगी रिपोर्ट

अस्पताल के आंगन में बने पार्क में महिला की डिलीवरी मामले की जांच के लिए शुक्रवार को अस्पताल प्रबंधन ने दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। सिविल अस्पताल के दो डाक्टरों कमेटी का हिस्सा बनाया है। कमेटी तीन दिन में मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सिविल अस्पताल प्रबंधन को सौंपेगी।

सिविल में उचित इलाज नहीं था संभव : एसएमओ

दोनों नवजात को बार-बार रेफर किए जाने पर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जिन हालत में बच्चे पैदा हुए हें ऐसे में उनका उचित इलाज सिविल अस्पताल में संभव नहीं था। एसएमओ हङ्क्षतदर कौर ने कहा कि बच्चे प्री मेच्योर हैं। कम वजन होने के कारण उन्हें यहां आधुनिक सेहत सुविधाएं नहीं मिल सकती थीं इसलिए उन्हें पीजीआइ रेफर किया गया था। वहां इलाज फ्री होता है। नवजात को वापस लेकर आने पर उनकी हालत गंभीर थी इसलिए उन्हें सीएमसी रेफर किया गया है। इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। महिला साढ़े छह माह की गर्भवती थी और अनीमिया व पीलिया से पीडि़त है।