लुधियाना, जेएनएन। दूसरी लहर में कोरोना के कारण हो रही मौतों के सरकारी आंकड़े और श्मशानघाटों पर कोविड प्रोटोकाल के तहत किए जा रहे अंतिम संस्कारों की संख्या में बड़ा अंतर समाने आ रहा है। मई व जून में श्मशानघाटों पर कोविड प्रोटोकाल के तहत किए अंतिम संस्कारों और सेहत विभाग के कोरोना से मौत के आंकड़े में करीब 50 फीसद का अंतर है।

विभाग के अनुसार मई में कोरोना के कारण 624 और जून में 54 लोगों की मौत हुई है। वहीं, नगर निगम के दरेसी, ढोलेवाल, माडल टाउन, गिल रोड दाना मंडी और बाड़ेवाल स्थित श्मशानघाटों पर मई में 1116 और जून 113 शवों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकाल के तहत किया गया है। इस पर सवाल उठता है कि कोविड प्रोटोकाल के तहत किए गए अंतिम संस्कार और विभाग के मौत के आंकड़े में इतना अंतर कैसे? हालांकि सेहत विभाग के अधिकारियों का कहना है नियमों के अनुसार संक्रमितों और संदिग्ध मरीजों का मौत के बाद अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

विभाग का तर्क : सिविल सर्जन कार्यालय में कोविड डेथ को लेकर नियुक्त किए नोडल अफसर डा. हरबीर सिंह का कहना है कि संक्रमित और संदिग्ध मरीजों का मौत के बाद कोविड प्रोटोकाल के तहत अंतिम संस्कार किया जाता है। भले ही उनकी कोविड रिपोर्ट नेगेटिव आ जाए। संदिग्ध मरीजों को भी कोविड वार्ड में भर्ती किया जाता है। उनके परिजनों संक्रमण से बचाने के लिए संदिग्ध मरीज की मौत के बाद उसका भी नियमों के तहत संस्कार किया जाता है। श्मशानघाट पर संस्कार और विभाग के कोरोना मौत के आंकड़े में इसलिए अंतर हो सकता है।

जिले में अब तक 86061 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 82279 स्वस्थ भी हो चुके हैं। अब तक 2058 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। वर्तमान समय में 25 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। राहत की बात यह है कि अब सक्रिय केस भी कम होकर 1724 रह गए हैं। इनमें से 1345 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। सक्रिय मामलों मे कमी से सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में कोविड बेड करीब 80 फीसद खाली हो गए हैं।

Edited By: Vikas_Kumar