लुधियाना, जेएनएन। जीवन बीमा कर्मचारियों के मुख्य संगठन नॉर्दर्न जोन इंश्योरेंस इंप्लाइज एसोसिएशन के तीन दिवसीय 32वें अधिवेशन की शुरुआत सोमवार को गुरु नानक देव भवन में हुई। बैठक के दौरान तमाम वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा एलआइसी को आइपीओ के जरिए स्टॉक मार्केट में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव की चौतरफा निंदा की। सभी वक्ताओं ने आशंका जताई कि इससे जहां एलआइसी में निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं यह पॉलिसीधारकों के लिए भी घातक साबित होगा। नेताओं ने साफ किया कि यदि सरकार इस प्रस्ताव को अमल में लाती है तो कर्मी लंबे संघर्ष के लिए तैयार हैं। इसके लिए अधिवेशन के अगले दो दिन में मंथन कर रणनीति बनाई जाएगी। वक्ताओं ने दावा किया कि पिछले 75 साल में एलआइसी ने देश के चालीस करोड़ पॉलिसीधारकों का भरोसा जीता है और राष्ट्र निर्माण में 28.28 लाख करोड़ रुपये की राशि खर्च की है। इसका जीवन बीमा मार्केट में 70 फीसद से अधिक शेयर है। बावजूद इसके एलआइसी में निजीकरण करना समझ से परे है।

32वें अधिवेशन की स्वागत कमेटी के चेयरमैन प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने कहा कि आज देश में चुनौतीपूर्ण हालात चल रहे हैं। अधिवेशन में मुख्यअतिथि के तौर पर पहुंचे पूर्व सांसद एवं सार्वजनिक क्षेत्र में संसदीय समिति के पूर्व अध्यक्ष रूप चंद पाल ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर अंगुली उठाते हुए उनको देश के लिए घातक बताया। पाल ने कहा कि पॉलिसीधारकों की छोटी-छोटी बचतों को उनकी बेहतरी के लिए एवं राष्ट्र निर्माण में लगाने के लिए ही एलआइसी का राष्ट्रीयकरण किया गया था। वे बोले कि यदि आइपीओ लाने का प्रस्ताव पारित हुआ तो एलआइसी का उद्देश्य की खत्म हो जाएगा। साथ ही इससे पॉलिसीधारकों को भी नुकसान होगा। पाल बोले कि इस प्रस्ताव का हर स्तर पर कड़ा विरोध किया जाएगा।

एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल भटनागर ने कहा कि अधिवेशन में मंगलवार को डेलिगेशन एवं ऑब्जर्वर सत्र शुरू किया जाएगा। इसमें तीन साल के कामकाम की समीक्षा होगी और अगले तीन साल के लिए श्रमिक विरोधी, किसान विरोधी, संगठन विरोधी सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष की रूपरेखा तैयार की जाएगी। लुधियाना मंडल के सचिव अमरजीत सिंह ने कहा कि देश में आर्थिक मंदी के बावजूद भारतीय जीवन बीमा निगम की बाजार की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और निगम बीमा क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है। इस अवसर पर एसोसिएशन के कई पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।

 

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