संवाद सहयोगी, समराला : लॉकडाउन खुलने के बाद कचहरियों में छोटे स्पांप पेपर की कमी से लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को बड़े स्टांप पेपर लेने पड़ रहे हैं। यह स्टांप पेपर नासिक से प्रिंट होकर आते हैं। वहीं, प्रशासन ने इनकी कमी को दूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। ज्यादातर 50 से 100 रुपये वाले स्टांप पेपर इस्तेमाल में आते हैं। क्योंकि यह स्टांप पेपर बैंकों, पावरकॉम, इकरारनामों, गाड़ियों की सेल परचेज, तलाकनामा आदि कार्यो में इस्तेमाल होते हैं।

छोटे स्टांप पेपर न मिलने से विक्रेताओं के पास भी 500 और 1000 रुपये के पेपर पड़े है, जिनका प्रयोग कम होता है। लोगों को यह पेपर मजबूरन लेने पड़ रहे हैं। वहीं, खजाना दफ्तर के अधिकारियों का भी इस ओर कोई ध्यान नहीं है। कचहरी में स्टांप पेपर लेने आए संतोख सिंह ने बताया कि उसने पावरकॉम कार्यालय में अपने नाम पर ट्यूबवेल कनेक्शन तब्दील करना है। उसे 100 रुपये के स्टांप पेपर की जरूरत थी, लेकिन यह उसे 500 रुपये का स्टांप पेपर लगाना पड़ा।

समराला की खजाना अफसर कमलजीत कौर ने माना कि स्टांप पेपर नासिक से आ रहे हैं। पूरे जिले में छोटे स्टांप पेपर की कमी है, इसे दूर करने के लिए वह लगातार जिला खजाना अफसर को सूचित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जितनी देर तक कोरोना महामारी चल रही है, तब तक कमी रह सकती है लेकिन इसका जल्दी समाधान किया जा रहा है। शिव सेना बाल ठाकरे के यूथ विग के पंजाब प्रधान रमन वडेरा ने कहा कि समराला मे छोटे स्टांप पेपर की चल रही कमी की जानकारी को लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर को देगें। वह मांग करेगें कि इस कमी को दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे रोजाना ही सैकड़ों लोगों की जेब को चूना लग रहा है।

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