जेएनएन, लुधियाना। नोबल पुरस्कार विजेता सर्जे हरोशे का कहना है कि साइंस से लगातार सीखने को मिलता है। भारतीय चंद्रयान-टू मिशन में स्पेस एजेंसी इसरो के वैज्ञानिकों को भी काफी कुछ सीखने को मिला है, ताकि भविष्य के मिशन को और बेहतर बनाया जा सके। उनका मानना है कि इस मिशन को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों ने काफी मेहनत की है। अंत में कुछ कमी रही, जिसका वैज्ञानिक लगातार आकलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइंस में हर चरण पर प्रोग्रेस होती है और हर चरण में सीखने को मिलता है। प्रो. हरोशे पीएयू में संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि इस मिशन से काफी उम्मीदें थी और यह लगातार मीडिया में छाया रहा। उनका मानना है कि चुनौतियों को ध्यान में रखकर और कुछ पाने की जिज्ञासा पर ही साइंस की खोज काम करती है। इसमें भविष्य अनिश्चिताओं से भरा रहता है। कई बार अच्छे परिणाम आते हैं और कई बार उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं आते और हम चकित हो जाते हैं। इस क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिक हर तरह की चुनौती से मुकाबला करने के लिए तैयार रहते हैं।

अधिक जनसंख्या वाले देश भारत में काफी चुनौतियां

प्रो. हरोशे ने कहा कि विश्व के अधिक जनसंख्या वाले देश भारत में काफी चुनौतियां हैं। बावजूद इसके देश में काफी कुछ बेहतर हो रहा है और यहां सीखने को मिलता है। नोबल कमेटी की सदस्य एवं क्लीनिकल इंटीग्रेटिव फिजियोलॉजी की प्रो जुलीन जीरथ ने शुगर के मरीजों की बढ़ रही संख्या पर चिंता जताई।

प्रो. हरोशे ने कहा कि शुगर के मरीजों की संख्या खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। शुगर के कारण ही मानव को काफी समस्याएं आ रही हैं। यह काफी चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नोबल प्राइस 2019 के विजेता का एलान अक्टूबर के पहले सोमवार को किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि नोबल में किसी अन्य कैटेगरी को शामिल करना मुश्किल है, क्योंकि वे पुरस्कारों के जनक एल्फर्ड नोबल के वचनों से बंधे हैं। 

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Posted By: Vipin Kumar

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