मुनीश शर्मा, लुधियाना : कोविड ने जहां देश की अर्थव्यवस्था को उथल-पुथल कर दिया है। वहीं, इससे पंजाब का औद्योगिक क्षेत्र भी अछूता नहीं है। पंजाब की औद्योगिक इकाइयां इन दिनों डिमांड होने के बावजूद अपनी क्षमता से बेहद कम प्रोडक्शन पर काम कर रही हैं। इसका मुख्य कारण कोविड के पश्चात कच्चे माल के दामों में आई बेतहाशा वृद्धि और इनकी उपलब्धता का कम हो जाना है। ऐसे में प्राइसवार में एक्सपोर्ट के बंपर आर्डर होने के बावजूद इंडस्ट्री इनका भुगतान करने से कतरा रही है। इसको लेकर हमें नई तकनीक और प्रैक्टिस अपनानी होंगी, ताकि हम कम वेस्टेज के साथ इनोवेटिव प्रोडक्ट ग्लोबल बाजार में उतारकर उद्योग को पंख लगा सकें। यह कहना है चेंबर आफ इंडस्ट्रीयल एवं कामर्शियल अंडरटेकिग (सीआइसीयू) के प्रधान एवं न्यू स्वान ग्रुप के सीएमडी उपकार सिंह आहुजा का। वे दैनिक जागरण से विशेष बातचीत के दौरान कोविड काल के बाद इंडस्ट्री की चुनौतियों, भविष्य की तैयारियों और आगे बढ़ने के लिए इंडस्ट्री की तैयारी पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज समय ग्लोबल मार्केट का है और इसके लिए हम सबको बदलाव करने होंगे और नई प्रैक्टिस के जरिए अपने उत्पादों की गुणवत्ता को बेहतर करना होगा।

सवाल -- कोविड इंडस्ट्री के लिए कैसी चुनौतियां पैदा की हैं?

उत्तर -- कोविड ने इंडस्ट्री में प्रोडक्शन को लेकर खासा बदलाव आया है। इस समय एडवांस आर्डर कांसेप्ट में बदलाव आया है, मार्केट की डिमांड स्लो है। ऐसे में आर्डर भी रुक रुक कर आ रहे हैं। इस समय इंडस्ट्री 60 से 80 प्रतिशत कैपेसिटी में प्रोडक्शन कर रही है। इसमें सबसे ज्यादा इफेक्ट आटो पा‌र्ट्स, एग्रीकल्चरल पा‌र्ट्स, ट्रैक्टर पा‌र्ट्स, मशीनटूल और हैंडटूल में आया है। सवाल -- एक्सपोर्ट तेज पर इंडस्ट्री को लाभ क्यो नहीं? जवाब -- इस समय एक्सपोर्ट को लेकर खासा उत्साह है और इसकी वजह कोविड के चलते बंद के चलते कई देशों में कंपनियों के पास स्टाक का समाप्त हो जाना है। लेकिन इस समय कच्चे माल खासकर लोहे एवं प्लास्टिक के दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि से एक्सपोर्ट के आर्डर आने से भेजने तक रोजाना भारी अंतर आ जाता है। इसके साथ ही एक्सपोर्ट के लिए कंटेनर भी दो गुणा तक महंगे हो गए हैं। इससे एक्सपोर्ट कर पाना अब आसान नहीं रहा।

सवाल -- ग्लोबल मार्केट के दौर में पंजाब उद्योग कैसे तरक्की करेगा? जवाब -- अब ग्लोबल बाजार एक हो चुका है और इसमें पंजाब के उद्योगों के लिए तरक्की के बेहतरीन रास्ते हैं। इसके लिए इनोवेशन के साथ साथ नए कांसेप्ट अपनाकर बेहतर क्वालिटी प्रोडक्ट बेहतर दामों में देने होंगे। भले ही हमारा मुकाबला चीन से है, लेकिन भारतीय उत्पादों की क्वालिटी बेहतर होने से अच्छे आर्डर मिल सकते हैं। हमें इनोवेटिव प्रोडक्ट वाजिब दामों में देने को बेहतर उत्पादों का निर्माण करना होगा।

सवाल -- सरकार मेक इन इंडिया को कैसे कर सकती है सफल?

जवाब -- अगर मेक इन इंडिया कांसेप्ट को अग्रसर करना है, तो इसके लिए सरकार को कोविड जैसे संकट दौर से इंडस्ट्री को निकालने के लिए ब्याज मुक्त लोन देने होंगे। इसके साथ ही इनोवेशन के लिए सरकार लेटेस्ट मशीनरी और कांसेप्ट से हर सेक्टर की इंडस्ट्री को कलस्टर डेवलपमेंट के माध्यम से अपग्रेड कर मेक इन इंडिया के सपने को साकार कर सकती है। सवाल -- सीआइसीयू अपने स्तर पर इंडस्ट्री अपग्रेड करने के लिए क्या कर रहा है? जवाब -- सीआइसीयू की ओर से इंडस्ट्री को अपग्रेड करने के लिए तरह तरह के प्रोग्राम, सेमिनार और वैबीनार आयोजित किए जाते हैं। इसके लिए गेम प्रोजेक्ट का एक बैच समाप्त हो चुका है और अब दूसरे बैच में युवाओं को ओवरआल इंडस्ट्रीयल ग्रोथ के टिप्स दिए जाएंगे। इसके साथ ही स्किल डेवलपमेंट के जरिए ट्रेंड वर्कफोर्स तैयार की जा रही है। अब सीआइसीयू में सेंटर फार मेन्यूफेक्चरिग एक्सीलेंस को लेकर काम किया जा रहा है। ताकि नए प्रोजेक्ट, इनोवेशन, साफटवेयर के माध्यम से इंडस्ट्री को अपग्रेड किया जा सके।

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