यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 03, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Power Crisis In Punjab: लुधियाना में बिजली संकट से इंडस्ट्री के पहिये थमे, एक दिन में 30 फीसद गिरा प्राेडक्शन
Power Crisis In Punjabडीजल महंगा होने के कारण उद्यमी जनरेटर के सहारे फैक्ट्रियां चलाने में खुद को असमर्थ बता रहे ...और पढ़ें

लुधियाना, [मुनीश शर्मा]। पंजाब में पैदा हुए बिजली संकट ने दो दिन से उद्योगों की मशीनों के पहिये जाम कर दिए हैं। एक लाख से अधिक छोटे-बड़े उद्योगों वाले शहर लुधियाना में शुक्रवार को बिजली की आपूर्ति ठप होने के कारण 30 फीसद से अधिक उत्पादन ठप हो गया है। कुल दो प्रतिशत यूनिट जनरेटर के सहारे चल रहे हैं। कई बड़ी औद्योगिक इकाइयों ने अवकाश घोषित कर दिया है। अधिकतर उद्योगों में पैकेजिंग और मशीनों की सफाई जैसे काम ही किए गए।
डीजल महंगा होने के कारण उद्यमी जनरेटर के सहारे फैक्ट्रियां चलाने में खुद को असमर्थ बता रहे हैं। अब यह डर सताने लगा है कि अगर ऐसे हालात तीन से चार दिन और रहे तो उनकी सप्लाई चेन टूट जाएगी और फैक्टियां पूरी तरह बंद हो जाएंगी। सरकार ने स्टील यूनिटों पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। ऐसे में कच्चा माल नहीं मिलने से इंजीनियरिंग से जुड़े उद्योगों में उत्पादन प्रभावित होगा। स्टील से संबंधित कच्चा माल बेचने वाले कालाबाजारी करने लगेंगे।
सूबे में 8887 यूनिट्स रहे बंद
पंजाब में 79 फीसद बिजली 100 किलोवाट से अधिक क्षमता वाली फैक्ट्रियों में प्रयोग होती है। राज्य में 8887 बड़े यूनिट हैं। इनमें 14261 मिलियन यूनिट बिजली का इस्तेमाल किया जाता है। 20 से 100 किलोवाट वाले मीडियम यूनिट में 2234 मिलियन यूनिट और स्माल इंडस्ट्री में 1063 मिलियन यूनिट बिजली का प्रयोग होता है। बड़े यूनिट बंद होने से सप्लाई चेन प्रभावित होगी। स्टील, धागा, इंजीनियरिंग, साइकिल, साइकिल पार्ट्स, हैंडटूल, मशीन टूल, एग्रीकल्चर पार्ट्स, होजरी, डाइंग इंडस्ट्री प्रभावित हुई।
सपना ही रह गया पांच रुपये यूनिट बिजली : नरिंदर भमरा
फास्टनर मैन्यू्फेक्चरर एसोसिएशन के प्रधान नरिंदर भमरा का कहना है कि पांच रुपए बिजली तो सपना ही रह गया है। अब तो हालात यह हैं कि उत्पादन के लिए भी बिजली नहीं मिल रही है। उद्योगों के पास पलायन के अलावा कोई रास्ता नहीं है। आए दिन नए फरमान परेशानी में डाल रहे हैं।
उद्योगों के लिए काले दिन : डीएस चावला
यूनाइटेड साइकिल एवं पार्ट्स मैन्यूफेक्चरर एसोसिएशन के प्रधान डीएस चावला का कहना है कि यह समय उद्योगों के लिए काले दिन के रूप में जाना जाएगा। हम निर्यात और आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं लेकिन बिजली न मिलने से उद्योग बंद करने पड़ रहे हैं।
