लुधियाना, [मुनीश शर्मा]। पर्यावरण संरक्षण को लेकर लुधियाना के उद्यमी भी ज्यादा सजग हो गए हैं। पर्यावरण संरक्षण तभी संभव है, जब पानी, बिजली और ईंधन जैसे डीजल, पेट्रोल और कोयले आदि की खपत कम कर उनकी बचत की जाए। इन तीनों की बचत के लिए कंपनियां अब एनर्जी ऑडिट करवा रही हैं। उद्यमियों की इस कवायद का सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहा है। बिजली, पानी और ईंधन की खपत कम होने के साथ उत्पादन लागत में भी दस से पंद्रह फीसद की कमी आ रही है। एनर्जी ऑडिट करवाने वाली कंपनिया बिजली की 6 से 7 प्रतिशत, फर्नेस आयल, डीजल और कोयले की 10 से 15 प्रतिशत और पानी की आठ से दस प्रतिशत बचत कर रही हैं।

एनर्जी ऑडिट में इन बातों पर देते हैं ध्यान

एनर्जी ऑडिट के दौरान ध्यान दिया जाता है कि किस तरह बिजली, पानी और ईंधन की बचत की जा सकती है। इसके लिए कई उपकरणों को बदलकर नई तकनीक इस्तेमाल करने के लिए कहा जाता है। वहीं, पानी और बिजली की वेस्टेज को रोकने के प्रयास किए जाते हैं। लीन मैन्यूफैक्चरिंग एक्सपर्ट एवं तारन इंडस्ट्री के एमडी एसबी सिंह के मुताबिक तीन तरह की एनर्जी ऑडिट में ली जाती है। इसमें पहली हीट एनर्जी पर फोकस होता है। इसमें हीटिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्यूल की सेविंग पर फोकस किया जाता है। इसके साथ ही इसमें बिजली के इस्तेमाल को कैसे कम किया जा सकता है, इस पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं। इसके बाद कंप्रेस्ड एयर की वेस्टेज को रोकने पर भी ध्यान देते हैं। सबसे अहम पहलू पानी की बचत पर फोकस करना है। एनर्जी ऑडिट में बताया जाता है कि किस काम के लिए बिजली, पानी और ईंधन का कितना इस्तेमाल होना चाहिए और कितना हो रहा है। इनकी खपत को किस तरह कम कर बचत की जा सकती है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ इंडस्ट्री को कास्ट कटिंग का लाभ हो जाता है। कई यूनिटों में इसे लागू कर उत्पादन लागत दस से पंद्रह प्रतिशत तक कम की जा चुकी है।

शहर की तीस से अधिक कंपनियों ने कराया एनर्जी ऑडिट

शहर की तीस से अधिक कंपनियों ने एनर्जी ऑडिट करवाया है। कई कंपनिया ऑडिट करवाने की तैयारी में हैं। इनमें न्यू स्वान ऑटो कंपोनेंट, बिगबेन प्रोडक्ट्स, अंबिका स्टील, पाई टूल्स, पंजू प्रोडक्ट्स, अप्पू इंटरनेशनल, अरोड़ा इंडस्ट्री, लक्ष्मी कास्ट एंव फोर्ज, बालाजी प्रोसेसर, दीयाना माइनिंग कंपोनेंट्स, ईश्मीत फोर्जिंग, हितेश कास्टिंग, आदिनाथ डाइंग, लुधियाना निट टेक, मूनलाइन ऑटो, मेटल एंड प्लास्टिक लिमिटेड, ओसवाल डाइंग एंव फीनिशिग मिल्स, आरबी इंडस्ट्री, रजनीश कास्ट एलाय, सौंद स्टील इंडस्ट्रीज, सच्जन कास्टिंग लिमिटेड, एकता डाइंग, रजनीश इंडस्ट्री, श्री बालाजी मिल्स, श्री टूल्स इंडस्ट्री, निक्स इंडिया टूल्स, गंगा एक्त्रोवूल्स, सनराइज डायर्स एंव प्रोसेसर आदि कंपनिया शामिल हैं।

इन कंपनियों को मिला लाभ

एकता डाइंग के एमडी सुभाष सैनी के मुताबिक एनर्जी ऑडिट से कंपनी को खासा लाभ हुआ है। यूनिट में कई जगह लाइटों को एलईडी में तब्दील किया गया है। इससे रोशनी बढ़ने से जहा कम लाइटें लगानी पड़ी हैं। वहीं, बिजली की भी बचत हो रही है। कई मोटरों को भी नई तकनीक से लैस कर बिजली की बचत कर रहे हैं। कंपनी ने लो लिक्वर डाइंग मशीन इंस्टाल करवाई है। मशीनें पैनल ड्राइव के साथ लगाई हैं।

पानी बचाने के लिए ऑटो कट

टूटिया बिगबेन एक्सपोर्ट के अंगद सिंह के मुताबिक ऊर्जा की बचत के लिए मशीनरी में ऑटो मोड सहित वायरिंग को बेहतर किया गया है। पानी बचाने के लिए ऑटो कट टूटिया लगाई गई हैं। वर्किंग एरिया में ज्यादा रोशनी के एलईडी लाइटों की व्यवस्था की गई है। साथ ही मशीनरी में नई ऑटोमेशन तकनीक को शामिल कर बेहतर कार्य लिया जा रहा है।

जागरूकता के लिए संगठन कर रहे काम

चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीयल एंड कॉमर्शियल अंडरटेकिंग (सीआइसीयू) के प्रधान उपकार सिंह आहुजा के मुताबिक एनर्जी ऑडिट करवाना कंपनियों के लिए बेहद जरूरी है। इससे बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है। चैंबर इसके लिए अधिक से अधिक उद्यमियों को जागरूक कर रहा है। यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान इन्द्रजीत सिंह नवयुग के मुताबिक आज एनर्जी सेविंग इंडस्ट्री की अहम जरूरत है। एसोसिएशन इसके प्रति जागरूकता के लिए काम कर रही है। इसके लिए आगामी दिनों में एक सेमिनार आयोजित किया जाएगा।

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