आशा मेहता, लुधियाना। गुरु अंगद देव वेटनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (गडवासू) के वैज्ञानिकों ने पहली बार भैंस के दूध से उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन तैयार किया है। यूनिवर्सिटी के डेयरी साइंस एंड टेक्नोलाजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. सुनील कुमार खटकड़ और एमटेक के छात्र कुलदीप सिंह ढूढी ने लंबे शोध के बाद इस विशेष तकनीक को विकसित किया है।

यूनिवर्सिटी को सरकार से इसके लिए पेटेंट भी मिल गया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में पहली बार भैंस के दूध से उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन तैयार किया गया है। इससे पहले कहीं भी भैंस के दूध से अधिक प्रोटीन वाला पाउडर तैयार नहीं किया गया है। प्रमुख शोधकर्ता डा. सुनील कुमार का कहना है कि भैंस के दूध से प्रोटीन पाउडर तैयार करने के लिए उन्होंने वर्ष 2018 में शोध शुरू किया था। हमने यह प्रोटीन मैमररेन तकनीक और सुखारडी तकनीक की मदद से दूध के प्रोटीन को उसके प्राकृतिक रूप में निकालकर और ड्राई कर इसे तैयार किया है।

दूध के प्रोटीन को नुकसान पहुंचाए बिना अधिकतर लेक्टोस, मिनरल और पानी को अलग कर दिया गया। इन तत्वों को इस तरह से निकाला कि प्रोटीन की प्रापर्टी न बदले। इससे प्रोटीन पाउडर की गुणवत्ता काफी बढ़ गई और हमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन मिला। यह जल्द और पूरी तरह घुल जाता है। इसकी फोमिंग अच्छी है। डा. सुनील के अनुसार अब वे तकनीक ट्रांसफर के लिए भी तैयार हैं। यह तकनीक पहले किसी के पास नहीं थी।

कई प्रोडक्ट बनाने में हो सकता है प्रयोग

डा. सुनील के अनुसार भैंस के दूध से तैयार किए इस प्रोटीन के कई फायदे हैं। इसे फूड मैन्युफेक्चरिंग इंडस्ट्री, स्पोर्ट्स ड्रिंक, फंक्शनल फूड, बेकिंग इंडस्ट्री, मेडिकोज इंडस्ट्री, हाई प्रोटीन फूड, एनर्जी बार, सप्लीमेंट्स, हाई प्रोटीन मिल्क, लो लेक्टोज मिल्क व एलर्जी फ्री प्रोटीन प्रोडक्ट बनाने में प्रयोग किया जा सकता है। यह एलर्जी फ्री प्रोटीन का अच्छा सोर्स हो सकता है। आयल को नहीं पकड़ता है, जिस कारण इसे फ्राइड फूड प्रोडक्ट्स व डाइटेटिक फूड बनाने में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

इससे मिलेगी अधिक एनर्जी

विज्ञानियों के अनुसार इसमें स्लो व फास्ट दोनों तरह का प्रोटीन है। इसका पाचन जल्दी और धीरे दोनों तरह से हो सकता है। इसे लेने से अधिक देर तक शरीर थकेगा नहीं। जल्दी भूख नहीं लगेगी। इससे वेट मैनेजमेंट और मोटापे को कंट्रोल करने में भी मदद मिलेगी। वर्कआउट के समय में अधिक एनर्जी मिलेगी।

पूरी दुनिया में जमा सकते हैं अपनी धाक

यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डा. इंद्रजीत सिंह का कहना है कि इस शोध से डेयरी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। हमारे देश में जरूरत का ज्यादातर प्रोटीन विदेशों से मंगवाया जाता है। मिल्क प्रोटीन तो विदेशों से मंगवाते हैं। मार्केट में गाय के दूध वाला मिल्क प्रोटीन हैं। भैंस के दूध से बने उत्पादन बनाने में हम दुनिया में नंबर एक पर हैं। उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन पाउडर से दुनिया में अपनी धाक जमा सकते हैं।

Edited By: Vinay Kumar