जेएनएन, लुधियाना। केंद्र की मोदी सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए सालाना आम बजट पेश करने की तैयारियों में जुट गई है। बजट से उद्यमियों को कई तरह की राहत मिलने की उम्मीद है। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कॉमर्शियल अंडरटेकिंग्स भी माइक्रो स्माल एंड मीडियम सेक्टर के उद्योगों की समस्याओं को लेकर बजट पूर्व ज्ञापन तैयार कर रहा है। इस ज्ञापन को शीघ्र ही केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजा जाएगा।

चैंबर के प्रधान उपकार सिंह आहूजा का मानना है कि कारपोरेट सेक्टर एवं पार्टनरशिप कंपनियों के लिए आयकर की दर एक समान होनी चाहिए। कारपोरेट टैक्स की दर बीस फीसद की जाए। उनका कहना है कि हांगकांग में कारपोरेट टैक्स की दर 19 फीसद है। इसी तरह कई अन्य देशों में भी कम टैक्स है। उपकार सिंह का कहना है कि बढ़ रहे आयात के कारण मैन्यूफैक्चरिंग बेस डगमगा रहा है।

आयात पर अंकुश लगाने के लिए तैयार उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी की दर बढ़ाई जाए, साथ ही चीन से आ रहे अंडर वैल्यू माल पर चेक लगाए जाएं। इससे देश में मैन्यूफैक्चरिंग बेस मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा इंडस्ट्री में आ रही मशीनरी पर कस्टम ड्यूटी कम की जाए। इससे घरेलू उद्योगों में विश्व स्तरीय तकनीक को प्रोत्साहन मिलेगा, इंडस्ट्री अपग्रेड होगी और ओवरसीज मार्केट में मुकाबला करना आसान होगा।

ऑटो सेक्टर पर जीएसटी 18 फीसद किया जाए

उपकार ने कहा कि ऑटो उद्योग पर जीएसटी की दर सबसे अधिक 28 फीसद है। इसका सीधा असर उद्योग की ग्रोथ पर हो रहा है। उद्यमियों की मांग है कि ऑटो सेक्टर पर जीएसटी 18 फीसद की जाए। इससे ऑटो उद्योग को बूस्ट मिलेगा। प्रधान के अनुसार सरकार ने एमएसएमई की निवेश सीमा बढ़ाने की वकालत की थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं किया गया है। जरूरत है कि इस सीमा को बढ़ाया जाए, ताकि उद्यमी भी कारोबार में विस्तार कर सकें।

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!