मोगा [सत्येन ओझा]। Stubble Management: धर्म सिर्फ पूजा-पाठ या गुुरुओं की वाणी तक ही सीमित नहीं है। समाज को सही दिशा देना और इसकी समस्याओं को दूर करना भी धर्म का ही हिस्सा है। इसी रास्ते पर चलते संत गुरमीत सिंह ने अपने गांव खोसा कोटला में पंजाब के दूसरे कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) प्लांट की नींव रख दी है। तीन एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित इस प्लांट में रोज पांच टन सीएनजी और 22 टन जैविक खाद तैयार होगी।

इस प्लांट को चलाने में एक साल में 7000 एकड़ क्षेत्र की पराली की खपत होगी। यानी खोसा कोटला के आसपास के आठ गांव की पराली इसी प्लांट में इस्तेमाल होगी। प्लांट तैयार होने पर आठ गांव पराली के प्रदूषण से बच जाएंगे। संत गुरमीत सिंह के निर्देशन में फतेह सीएनजी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी यह प्लांट लगाएगी। प्लांट को भले ही प्राइवेट कंपनी लगा रही हो, लेकिन इसकी पूरी रूप रेखा संत गुरमीत सिंह ने ही तैयार की। उन्हीं के निर्देशन में प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया। यह प्लांट एक साल में काम करना शुरू कर देगा।

इससे पहले, संत गुरमीत सिंह अपने तीन हजार की आबादी वाले गांव खोसा कोटला को पराली की आग से होने वाले प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त करवा चुके हैं। चार साल से गांव के किसान यहां पराली को आग नहीं लगा रहे हैं। संत की गुरु साहिब चैरिटेबल सोसायटी पराली खरीदकर इसे बिजली बनाने वाली कंपनी को बेच देती है।

जीरो प्रदूषण का माडल

प्रोजेक्ट की प्रक्रिया पूरी करने में लगे संत गुरमीत सिंह की टीम के अंग्रेज सिंह ने बताया कि बिजली वाले प्लांट में पराली जलाई जाती है। अपेक्षाकृत वहां पराली जलाने से प्रदूषण काफी कम होता है, लेकिन पूरी तरफ खत्म नहीं होता है। सीएनजी प्लांट में पराली को बहुत बारीक टुकड़ों में काट कर इसे 32 मीटर गुणा 20 मीटर के टैंक में डालकर उसमें बैक्टीरिया छोड़े जाते हैं। इससे पराली का सड़नी शुरू हो जाती है। उसके साथ ही उसमें से सीएनजी गैस बननी शुरू हो जाती है।

इस प्रोसेस में 22 टन प्रतिदिन जैविक खाद तैयार होती है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रदूषण नाम मात्र को भी नहीं होता है। इसे जीरो पाल्यूशन माडल पर तैयार किया जाएगा। पहला प्लांट संगरूर के लहरागागा में लग रहा है। इसमें 45 टन सीएनजी तैयार होगी। इसे जर्मनी की कंपनी तैयार कर रही है। इसका काफी काम पूरा हो चुका है। यह मार्च 2022 तक शुरू हो जाएगा।

पराली की गांठें तैयार करने को इंग्लैंड से मंगवाई मशीनें

पराली की गांठें तैयार करने के लिए संत गुरमीत सिंह ने इंग्लैंड से दो अत्याधुनिक तकनीक वाले बेलर व दो ट्रैक्टर मंगवा लिए हैं। देश में बने आठ बेलर पहले ही खरीदे जा चुके हैं। पराली को प्लांट के नजदीक के गांव में नौ एकड़ जगह में स्टोर किया जाएगा। इसकी व्यवस्था संत गुरमीत सिंह ने ही की है। उनका कहना है कि प्लांट से तैयार होने वाली आर्गेनिक खाद पराली देने वाले किसानों को दी जाएगी। उन्हेंं प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे रासायनिक खाद की जगह आर्गेनिक खाद का प्रचलन बढ़ेगा।

कई जिलों में बिछाई पाइप, फिलिंग स्टेशन भी तैयार

प्लांट ने केंद्र सरकार की योजना के लिए आवेदन किया है। योजना के तहत केंद्र सरकार कंपनी से 10 साल तक 46 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से सीएनजी खरीदेगी। इसके लिए पंजाब के विभिन्न जिलों में पाइपलाइन डालकर फिलिंग स्टेशन भी तैयार किए जा चुके हैं। यह पाइपलाइन गुजरात तक जाएगी। पूरे प्रोजेक्ट 22 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा। इसमें से 4.30 करोड़ रुपये की सब्सिडी केंद्र सरकार देगी। 70 फीसद धनराशि बैंक से लोन के रूप में मिलेगी, जबकि 30 फीसद राशि सीड मनी के रूप में कंपनी को खुद लगानी पड़ेगी।

चार गुरुद्वारों के सेवादार हैं संत बाबा गुरमीत सिंह

संत बाबा गुरमीत सिंह जी चार गुरुद्वारों के सेवादार हैं। वे वर्ष 2015 से श्री गुरुद्वारा साहिब गुरु गुरसर पातशाही छठी, श्री गुरुद्वारा बाबा रणधीर (खोसा रणधीर), श्री गुरुद्वारा साहिब बाबा साहिब सिंह जी शहीद (खोसा पांडो) और श्री गुरुद्वारा साहिब (खोसा जलाल) के मुख्य सेवादार के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। संत बाबा फतेहसिंह जी के ब्रह्मलीन होने के बाद संत बाबा गुरमीत सिंह जो गद्दी मिली थी। वे गांव खोसा कोटला, खोसा रणधीर, खोसा जलाल और खोसा पांडो में पिछले छह सालों से समाजसेवा के कार्यों में जुटे हैं।

उन्होंने नौजवानों के लिए शानदार स्टेडियम बनाए। उनका कहना है कि सीएनजी प्रोजेक्ट एक साल में पूरा होने की उम्मीद है। बड़े जमींदार भी इस प्रकार के प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। ये सारे काम उन्होंने कारसेवा से पूरे किए हैं। पराली के प्रबंधन में भी काफी काम कार सेवा से ही हो रहा है।

 

Edited By: Kamlesh Bhatt