जेएनएन, श्री माछीवाड़ा साहिब (लुधियाना)। प्रधानमत्री नरेद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर से की गई नोटबंदी के बाद से पंजाब की आर्थिक स्थिति बदहाल होती जा रही है। छोटी फैक्ट्रियों के साथ-साथ अब बड़ी औद्योगिक इकाइयां भी इसकी चपेट मे आ गई हैं। आर्थिक घाटे के चलते पिछले दो सप्ताह के दौरान पांच औद्योगिक इकाइयों के मालिकों ने 2 महीने के लिए अपनी फैक्ट्री बंद कर करीब पांच हजार कर्मचारी की छुट्टी कर दी है।

माछीवाड़ा-कोहाड़ा रोड पर अनेको बड़ी व छोटी फैक्ट्रियां है, इनमें पजाब व अन्य राज्यों से आए हजारों लोग नौकरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं, लेकिन 8 नवंबर के बाद से आर्थिक स्थिति सुधरने के बजाय और गंभीर होती जा रही है। इस कारण फैक्ट्री मालिकों ने दो महीनों के लिए फैक्ट्रियों को बंद कर दिया है।

फैक्टरी मालिकों के अनुसार बाजार में नगदी का प्रसार कम होने के कारण उनके पास कोई खरीदार नहीं आ रहा। इस कारण गोदाम भरे पड़े है और मजबूरन बिक्री न होने के कारण मिल के प्रबंधकों को ये निर्णय लेना पड़ा।
कोहाड़ा रोड पर स्थित गाव हाडिया के अड्डे पर मोबाइल की दुकान करते हिमांशु जैन ने बताया कि उनकी दुकानदारी मिलों में काम करने वाले कर्मचारियो पर ही निर्भर है। नोटबंदी के कारण उनकी दुकानो पर मोबाइल खरीदने व रिचार्ज कराने की बिक्री 10 प्रतिशत रह गई है और नोटबंदी के कारण मिलें बंद होने लगी हैं, ऐसी स्थिति में वह बिल्कुल बेरोजगार हो गए हैैं।

कोहाड़ा रोड पर स्थित करियाना की दुकानो पर काम करते दुकानदारो ने बताया कि मिलों में काम करने वाले कर्मचारी प्रत्येक महीने उनसे राशन ले जाते थे और वेतन मिलने पर पिछला भुगतान कर देते थे। इससे उनका रोजगार चलता था। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की तरफ उनका लाखों रुपये का उधार भी है परंतु नोटबंदी के बाद उन्होंने जान पहचान वालों को और उधार सामान दे दिया कि आॢथक स्थिति सुधरने पर उनको पैसे मिल जाएंगे, परंतु मिलें बंद होने के कारण उनको चिंता सताने लगी है कि कहीं उनके रुपये न फंस जाएं।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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