लुधियाना, जेएनएन। Dainik Jagran Ayushman Conclave : कोरोना के मामले में भले ही जिले में रिकवरी रेट 96 फीसद तक हो गया है, लेकिन लोग अभी इस संक्रमण को हल्के में न लें। कोरोना से बचाव करना है तो सिर्फ तीन उपाय आपके लिए सर्वश्रेष्ठ हैं और और वो हैं- सही ढंग से मास्क पहनें, अच्छे से हाथ धोएं और शारीरिक दूरी का पालन करें। संक्रमण से बचाव के लिए ये सबसे बड़े हथियार हैं। हालांकि लोग अब कोरोना को लेकर लापरवाह हो रहे हैं, जो अच्छा संकेत नहीं है। ये बातें शहर के वरिष्ठ डाक्टर्स ने दैनिक जागरण की तरफ से आयोजित आयुष्मान कान्क्लेव में कहीं।

डाक्टर्स ने कोरोना काल के बाद स्वास्थ सेवाएं मुहैया करवाने में मुख्य चुनौतियों पर चर्चा भी की। कार्यक्रम में शहर की उन संस्थाओं और शख्सियतों को सम्मानित किया, जिन्होंने कोरोना काल में लोगों की बढ़चढ़कर मदद की। इनमें आस-अहसास ट्रस्ट, संवेदना ट्रस्ट, जीवन कैंसर सहयोग ट्रस्ट, कोरोना मरीजों को लाने-ले जाने वाले एंबुलेंस ड्राइवर, सिविल अस्पताल के डाक्टर, नर्स और कोरोना मृतकों का अंतिम संस्कार करने वाले लोग शामिल रहे।

डाक्टरों एवं स्वास्थ्य माहिरों ने काेराेना काे बताया बड़ा खतरा

कान्क्लेव आयुष्मान इंडिया-2020 में विचार रखते डा. संजीव उप्पल।

दैनिक जागरण की ओर से मोंटे कार्लों के सहयोग से होटल आन में मंगलवार को आयोजित कान्क्लेव आयुष्मान इंडिया-2020 में शहर के प्रतिष्ठित डाक्टरों एवं स्वास्थ्य माहिरों ने एक सुर में कहा कि अभी कोरोना का खतरा टला नहीं है, लोगों को सचेत रहने की जरूरत है। जब तक वैक्सीन नहीं आती, तब तक मास्क, सेनिटाइजेशन एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग को लेकर लापरवाही कतई नहीं बरतनी होगी। लोगों को इससे बचाव के लिए लगातार जागरूक करना होगा, जरा सी लापरवाही घातक हो सकती है। समाज के हर वर्ग को अपनी सार्थक जिम्मेदारी निभानी होगी।

माहिरों ने कोरोना के साथ अब तक लड़ी जंग में सरकारी एवं निजी मेडिकल स्वास्थ्य सेवाओं के योगदान को सराहा और साफ किया कि अभी भी चुनौती कम नहीं हुई है। इंग्लैंड समेत यूरोप के देशों में कोरोना के नए रूप को लेकर भी माहिरों ने मंथन किया और भविष्य में इस अप्रोक्ष विश्व युद्ध से लडऩे की रणनीति पर मंथन किया। इस कान्क्लेव में को पार्टनर मोंटे कार्लो के अलावा अस्पताल पार्टनर मोहन देई ओसवाल अस्पताल रहे। माहिरों ने इस मंच पर कोरोना बीमारी के दौरान मरीजों को आ रही पेचीदगियों को लेकर भी चर्चा की और उससे पार पाने के मेडिकल फार्मूलों को लेकर एक दूसरे के साथ विचार एवं तजुर्बे सांझा किए।

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कोरोना को हराने के लिए लोगों का मनोबल बढ़ाने की जरूरत

कोरोना महामारी से निपटने को लेकर जहां सरकारी अस्पतालों के हेल्थ केयर वर्करों, डाक्टरों और अन्य स्टाफ ने अपने आप को पूरी तरह समर्पित कर दिया, वहीं निजी अस्पतालों ने भी बेहतर मेडिकल व क्रिटिकल केयर देकर गंभीर मरीजों की जिंदगी बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब तक हमने बड़ी बहादुरी से लड़ाई लड़ी है। लेकिन अब आगे इस लड़ाई को और अधिक जनून व जज्बे के साथ लडऩा होगा। कोरोना को हराने के लिए लोगों के मनोबल को बढ़ाने की जरूरत है। यह तभी होगा, जब लोगों को सक्सेस स्टोरी के साथ बताया जा सके कि कोरोना को जागरूकता व सावधानी के साथ मात दी जा सकती है। --- डा. संजीव उप्पल (सीईओ, मोहनदेई ओसवाल अस्पताल)

कान्क्लेव आयुष्मान इंडिया-2020 में विचार रखते योगेंद्र आवाधिया।

सभी को मिलकर लडऩा होगा

इस बीमारी से भविष्य में भी संकट बना रहेगा। अत: लोगों को मिलकर लडऩा होगा।  इसके लिए लोगों को अस्पताल प्रबंधन और डाक्टरों का सहयोग करना होगा। सभी संभव हो पाएगा।

-- योगेंद्र आवाधिया (हेड आपरेशन्स, मोहन देई ओसवाल हास्पिटल)

काउंसलिंग से पैनिक फैक्टर को कम करने की जरूरत

कान्क्लेव आयुष्मान इंडिया-2020 में  बातचीत करतीं  डा. गीति पुरी।

कोरोना को लेकर अभी भी पैनिक फैक्टर बना हुआ है। मरीज जब अस्पताल आते हैं, तो वह काफी डरे होते हैं। इस डर की वजह से कोरोना संक्रमित होने के साथ साथ उन्हें दूसरी बीमारियां भी अपनी चपेट में लेती है। ऐसे में साइकोलॉजिकल पार्ट को और बेहतर बनाने की जरूरत है। इसके लिए अस्पतालों में मरीजों की काउंसङ्क्षलग को जरूरी किया जाना चाहिए। -- डा. गीति पुरी, कोविड-19 नोडल अफसर मोहनदेई ओसवाल अस्पताल

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जल्दी जांच व इलाज से लोगों को जागरूक करना होगा

कान्क्लेव आयुष्मान इंडिया-2020 में  विचार रखते हुए डा. अमित धीमान। 

कोरोना के गंभीर केस इसलिए आ रहे हैं, क्योंकि जल्दी जांच और इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है। इतना समय बीत जाने के बाद भी कोरोना महामारी से लडऩे के लिए लोग आगे नहीं आ रहे हैं। मरीज अभी भी कोरोना काके हल्के में ले रहे हैं, जो कि उचित नहीं है। लोगों को जांच व इलाज के लिए जागरूक करना होगा।

- डा. अमित धीमान, डायरेक्टर मेडिकल ओंकोलॉजी दीप अस्पताल

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Edited By: Vipin Kumar

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