लुधियाना, जेएनएन। भारत धर्म प्रचारक मंडल ने वेदाचार्य स्वामी निगम बोध तीर्थ के सानिध्य में मकर संक्रांति उत्सव श्रद्धापूर्वक मनाई गई। सर्वप्रथम देवेश्वानंद तीर्थ दंडी स्वामी भास्करानंद तीर्थ की समाधि पर नमन कर सभी के लिए सुख व समृद्धि की मंगल कामना की। इस अवसर पर सत्संग सभा का आयोजन किया गया। जिसमें महाराज श्री ने संक्रांति पाठ सुनाते हुए कहा कि आज सूर्य भगवान धनु से मकर राशि के अंदर प्रवेश कर गए है। इस माह के अंदर हवन यज्ञ का बहुत बड़ा महत्व है।

इस माह में भगवान सूर्य के निमित मांग महीने में ब्राह्मण को वस्त्र दान करना चाहिए। अन्न दान करना चाहिए और ब्राह्मणों के द्वारा वेद मंत्र का पाठ श्रवण करना चाहिए। भागवत इत्यादि को श्रवण करने से मनुष्य के अनेक जन्म जन्मांतर के पाप कट जाते है। उन्होंने आगे कहा कि वर्ष की प्रथम संक्रांति पर सभी को तीर्थ स्थानाें में स्नान व दान पुण्य पर सच्चे से सहयोग करना चाहिए। इस अवसर पर पं. दीप वशिष्ठ, पं. दीपक, पवन दीदी, आदि ब्राह्माण मंडल ने स्वामी जी से आशीर्वाद लिया।

पौराणिक मान्यताएं भी

मान्यता है कि लोहड़ी के दिन आग राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में आग जलाई जाती है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया तो पुत्री सती और दामाद शिव को आमंत्रित नहीं किया। इस पर सती ने अपने पिता से इसका कारण पूछा तो वे दोनों की निंदा करने लगे। इससे सती ने क्रोधित होकर उसी यज्ञ में अपनेआप को भस्म कर लिया। सती की मृत्यु यह समाचार सुनकर भगवान शिव ने यज्ञ को विधवंस कर दिया। तभी से सती की याद में इस पर्व पर आग जलाने की परंपरा है।

 

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