जागरण संवाददाता, लुधियाना। फरीदकोट में बुर्ज जवाहर सिंह वाला से पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब के चोरी होने और बेअदबी की साजिश रचने वाले मामले की जांच एसआइटी कर रही है। एसआइटी ने मामले में डेरा सच्चा सौदा की चेयरपर्सन विपासना इंसां और प्रबंधक डा. पीआर नैन को सम्मन किया है। लुधियाना रेंज के आइजी एसपीएस परमार इस एसआइटी के चीफ हैं। उनके लुधियाना कार्यालय में उनसे सवाल जवाब किए जाने वाले थे,  मगर अब इस पूछताछ को अगले सप्ताह शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। पहले भी दाे बार समन जारी हाे चुके हैं। अब तीसरी बार समन जारी किए जा रहे हैं।

आइजी परमार ने कहा कि एसआइटी ने शुक्रवार के लिए लुधियाना में चेयरपर्सन विपासना इंसा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा. पीआर नैन को तलब किया था। मगर डा. पीआर नैन ने खुद को अस्वस्थ बताते हुए अपना मेडिकल भेज दिया, जबकि विपासना इंसा के बारे में पूछने पर डा. नैन ने कहा कि वो पिछले डेढ़ साल से लापता है। बता दें, सुनारिया जेल में 9 नवंबर को हुई पूछताछ के दौरान डेरा प्रमुख ने बेअदबी की घटनाओं में किसी भी तरह की संलिप्तता से इन्कार किया था।

डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम का दावा था कि डेरे में कामकाज देखने या निर्णय लेने में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। उसकी भूमिका "सत्संग" करने और डेरा अनुयायियों को उपदेश देने तक सीमित थी, इसलिए बेअदबी की घटनाओं में आगे की जांच के लिए एसआइटी ने चेयरपर्सन और प्रबंधक को सम्मन किया है। आरोप है कि सिरसा के डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में बेअदबी की घटनाओं की साजिश रची गई और डेरा सदस्यों द्वारा कथित तौर पर इसे अंजाम दिया गया। इसके आधार पर डेरा प्रमुख को जुलाई 2020 में बेअदबी की घटनाओं में मुख्य आरोपित बनाया गया था।

डेरा प्रमुख से पूछताछ कर चुकी है एसआइटी

नवंबर माह की शुरुआत में एसआइटी प्रमुख एसपीएस परमार, एसएसपी मुखविंदर भुल्लर ने सुनारिया जेल में हत्या और दुष्कर्म के मामलों की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम से पूछताछ की थी। इस दौरान डेरा प्रमुख ने पुलिस को सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दिए थे। उसके द्वारा यह कहने पर कि डेरे में कामकाज के फैसले प्रबंधक कमेटी द्वारा लिए जाते थे, इसलिए डेरे की प्रबंधक कमेटी को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है।

6 साल पुराना गुरु ग्रंथ साहिब की चोरी का मामला

पंजाब पुलिस की एसआइटी 6 साल पहले दर्ज हुए बेअदबी के एक मामले में डेरा प्रमुख से पूछताछ करना चाहती है। यह मामला 1 जुलाई 2015 का है। जब फरीदकोट जिले में बरगाड़ी से 5 किलोमीटर दूर स्थित गांव बुर्ज जवाहर सिंहवाला के गुरुद्वारे से गुरु ग्रंथ साहिब का पावन स्वरूप चोरी हो गया था। 24 सितंबर 2015 को बरगाड़ी में गुरुद्वारे के पास हाथ से लिखे दो पोस्टर लगे मिले। आरोप है कि पंजाबी भाषा में लिखे इन पोस्टरों में अभद्र भाषा इस्तेमाल की गई और पावन स्वरूपों की चोरी में डेरा सच्चा सौदा का हाथ होने की बात भी लिखी गई। 12 अक्टूबर 2015 को बुर्ज जवाहर सिंह वाला की गलियों में पावन स्वरूप के अंग बिखरे मिले। 14 अक्टूबर को फरीदकोट के गांव बहबलकलां में धरना दे रही संगत को हटाने के दौरान पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई। उसी दिन कोटकपूरा में भी धरना लगाकर बैठे सिख समुदाय के लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज और फायरिंग की।

अब तक 5 की गिरफ्तारी

बुर्ज जवाहर सिंह वाला से पावन स्वरूप चोरी होने और बहबलकलां व कोटकपूरा में हुए गोलीकांड को लेकर पुलिस ने साल 2015 में 3 अलग-अलग एफआइआर दर्ज कीं। इनमें पांच डेरा प्रेमियों रणदीप सिंह उर्फ नीला, रणजीत सिंह, बलजीत सिंह, निशान सिंह और नरिंदर कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया गया, जो अब जमानत पर चल रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा की नेशनल कमेटी के 3 सदस्य संदीप बरेटा, प्रदीप कलेर और हर्ष धूरी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए गए। इन तीनों का आज तक कोई सुराग नहीं लगा।

6 जुलाई 2019 को डेरा प्रमुख को बुर्ज जवाहर सिंहवाला से पावन स्वरूप चोरी होने के मामले में बाजाखाना थाने में दर्ज एफआइआर नंबर-62 में नामजद कर लिया गया और अब इसी केस में डेरा प्रमुख को पूछताछ के लिए प्रोडक्शन वारंट लिया गया है। साल 2015 में बेअदबी का मामला गरमा गया और 2017 के पंजाब विधानसभा के चुनाव में यह सबसे बड़ा मुद्दा बना। अब तक इस मामले की जांच सीबीआइ के अलावा पंजाब पुलिस की तीन अलग-अलग एसआइटी कर चुकी हैं, लेकिन बेअदबी करने वाले असल दोषियों के नाम सामने नहीं आ पाए हैं। अब पंजाब सरकार की एसआइटी ने इस मामले में पहली बार पूछताछ के लिए राम रहीम का प्रोडक्शन वारंट मांगा था।

Edited By: Kamlesh Bhatt