लुधियाना, जेएनएन। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की हर परीक्षा में लुधियाना के विद्यार्थियों ने हमेशा परचम लहराया है। कोरोना महामारी के बीच आई चुनौती के बीच भी विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो इसके लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। गांवों में आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के लोगों को आनलाइन शिक्षा का पूरा लाभ पहुंचाने के लिए बड्डी  कांसेप्ट को लागू किया गया और यह कामयाब रहा। स्मार्ट स्कूल व स्मार्ट क्लास रूम बनाने का सिलसिला जारी है। सरकारी स्कूलों को भी प्राइवेट की तरह तैयार किया जा रहा है। स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करके एनरोलमेंट बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। पिछले साल भी सरकारी स्कूलों में सूबे के सबसे अधिक नए विद्यार्थी एनरोल किए गए। जिला शिक्षा अधिकारी सेकेंडरी हरजीत सिंह ने दैनिक जागरण को दिए साक्षात्कार में शिक्षा क्षेत्र में हो रहे काम और बदलाव को लेकर हर बिंदु पर अपना नजरिया सामने रखा।

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पिछले साल की 12 प्रतिशत इनरोलमेंट को है बढ़ाना
डीईओ हरजीत सिंह ने कहा कि सरकारी स्कूलों में विभाग इतनी सुविधाएं मुहैया करवा रहा है कि उन्हें माडर्न कहना गलत नहीं होगा। पिछले साल लुधियाना जिले के सरकारी स्कूलों में 12 प्रतिशत इनरोलमेंट हुई थी जो कि विद्यार्थियों की गिनती के मुताबिक पंजाब में सबसे अधिक थी। इस साल का सारा फोकस इनरोलमेंट पिछले साल से बढ़ाने का है। इसके लिए हर रोज बैठकें की जा रही हैं। दाखिला मुहिम के लिए स्कूलों को ई-प्रोस्पेक्टस फेसबुक पेज पर डालने, फ्लैक्स व होर्डिंग, स्कूल की उपलब्धियों का जिक्र इंटरनेट मीडिया से किया जा रहा है।

क्लास रूम को स्मार्ट बनाने के लिए जारी हुआ फंड
लुधियाना जिले में 1525 सरकारी स्कूल हैं। इनमें मिडल 190, हाई 162, सीनियर सेकेंडरी 181 और प्राइमरी 992 स्कूल हैं। शिक्षा विभाग ने क्लास रूम को स्मार्ट बनाने के लिए फरवरी में फंड जारी किया है। जिले के 1364 स्कूलों में स्मार्ट क्लास को और अधिक स्मार्ट बनाने के लिए एक करोड़ रुपये मिले हैं।
- 890 प्राइमरी स्कूलों के लिए 53.40 लाख रुपये।
- 152 मिडल स्कूलों के लिए  9.12 लाख रुपये
- 145 हाई स्कूलों के लिए 13.05 लाख रुपये
- 177 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए 26.55

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ग्रामीण इलाकों में बड्डी ग्रुप कर रहे मदद
डीईओ सेकेंडरी का कहना है कि कोरोना महामारी ने हर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों विशेषकर ग्रामीण इलाकों में आनलाइन शिक्षा जारी रखना किसी चुनौती से कम नहीं था। कई ऐसे परिवार थे जिनके पास स्मार्टफोन नहीं था। इन परिवारों के बच्चों को एक जगह इकट्ठा कर बड्डी ग्रुप आनलाइन पढ़ाई में उनकी मदद कर रह हैं।

 

 

 

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