जागरण संवाददाता, लुधियाना। मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने पानी के बिलों में कटौती कर 50 रुपये प्रति माह तय कर दिया है। सरकार के इस फैसले से जहां लोगों को राहत मिलेगी, वहीं नगर निगम के लिए यह फैसला परेशानी का सबब बनने वाला है। नगर निगम को हर माह पानी के ट्यूबवेलों का बिजली बिल छह करोड़ रुपये से ज्यादा देना होता है।

पानी के बिलों में कटौती से एक तो निगम की आय कम हो जाएगी, वहीं दूसरी तरफ से निगम को ट्यूबवेलों के बिजली बिल का भुगतान करने के लिए दूसरी मदों से फंड खर्च करना होगा। कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु की पत्नी व पार्षद ममता आशु ने फेसबुक पर पोस्ट डाल मुख्यमंत्री से अपील की है कि नगर निगम के ट्यूबवेलों का बिजली बिल पंचायतों की तर्ज पर माफ किया जाए।

शहर में हैं 1000 से अधिक ट्यूबवेल, सालाना 75 करोड़ रुपये होता है खर्च

नगर निगम के 1000 से ज्यादा छोटे-बड़े ट्यूबवेल हैं। प्रति माह निगम को छह करोड़ रुपये से ज्यादा बिल अदा करना होता है। इस तरह सालभर में निगम को लगभग 75 करोड़ रुपये ट्यूबवेलों के बिल व मेंटेनेंस पर खर्च करने पड़ते हैं। वाटर-सीवरेज से निगम को हर साल 90 करोड़ रुपये से कम की आय होती है। इसके अलावा ओएंडएम ब्रांच में नगर निगम के सबसे ज्यादा कर्मचारी हैं।

125 वर्ग गज तक वालों से नगर निगम पहले ही पानी सीवरेज के बिल नहीं वसूलता है और अब 125 वर्ग गज से ऊपर वालों से भी सिर्फ 50 रुपये बिल लेने पर निगम की ओएंडएम ब्रांच की रिकवरी बेहद कम हो जाएगी। ममता आशु ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि अगर सरकार निगम के ट्यूबवेलों का बिल माफ कर देती है तो इस रकम को शहर के विकास कार्यों में प्रयोग किया जा सकता है।

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