जागरण संवाददाता, लुधियाना : लगभग सात साल से कबाड़ हो रही 37 सिटी बसों की जांच के लिए लुधियाना सिटी के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स ने एक कमेटी बनाने का फैसला लिया है। इस कमेटी में निगम, पीआरटीसी और आरटीए दफ्तर के कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा। जांच कमेटी के सदस्य इन बसों की बारीकी से जांच कर यह रिपोर्ट तैयार करेंगे कि इन बसों को दोबारा शहर में चलाने के लिए कितना पैसा खर्च होगा। अगर यह बसें चलने लायक नहीं हैं तो इनका क्या किया जाए। कमेटी की इस रिपोर्ट आने के बाद ही आगे फैसला लिया जाएगा।

वर्ष 2011 में जेएनएनआरयूएम के तहत 65 करोड़ में 120 सिटी बसों को खरीदा गया था। साल 2011 से लेकर साल 2013 तक सिटी बसों को निगम ने खुद चलाया था। दिसंबर 2013 में सिटी बसों को चलाने का जिम्मा निगम ने प्रसन्ना कंपनी को सौंप दिया था। इस कंपनी दस रूट पर 59 बसों को चलाया था। पैसों को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद प्रसन्ना कंपनी ने 20 जुलाई 2014 को सिटी बस सेवा को बंद कर दिया था। जनवरी 2015 में निगम ने दोबारा टेंडर कर सिटी बसों का संचालन होराइजन कंपनी को दे दिया था। कंपनी 83 बसें चलाने का काम लिया था और बाकी बची 37 बसे निगम के ताजपुर रोड स्थित यार्ड में खड़ी हैं। इतने सालों से यह बसे वहां खड़ी कबाड़ हो रही हैं। सिटी बस सेवा का मुद्दा हर बाद उठता है।

मंगलवार को बोर्ड आफ डायरेक्टर्स की बैठक निगम कमिश्नर शेना अग्रवाल की अगुआई में हुई। इस बैठक में बसों की हालत जानने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद बोर्ड आफ डायरेक्टर अगला फैसला लेंगे। दैनिक जागरण ने उठाया था मुद्दा

दैनिक जागरण ने कई बार इन सिटी बसों को चलाने का मुद्दा उठाया है। इससे एक तो लोगों को सहूलियत मिलेगी और दूसरी तरफ निगम को भी अमदनी होगी। बीते दिनों कुछ उद्योगपतियों ने भी दैनिक जागरण से बातचीत के दौरान कहा था कि अगर निगम इन कबाड़ हो रही बसों को दुरुस्त करवाकर इंडस्ट्रीयल रूट पर चलाए तो इससे श्रमिकों का बड़ी समस्या दूर हो सकती है। अब सभी की निगाहें कमेटी का जांच रिपोर्ट पर टिक गई हैं।

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