लुधियाना, [मुनीश शर्मा]। Electricity Crisis In China: चीन में गहराए बिजली संकट ने अब इसका प्रभाव भारतीय उद्योगों पर भी पड़ना शुरू हाे गया है। औद्योगिक नगरी लुधियाना में कोयले की भारी खपत होती है, इसका मुख्य रुप से इस्तेमाल कास्टिंग यूनिट्स, लोहे, डाइंग और कई अन्य प्रोडक्शन प्रोसेस में किया जाता है। ऐसे में चीन से आयात होने वाले कोयले के दामों में जहां भारी इजाफा हुआ है, वहीं अब स्वदेशी कोयले के दामों में भी एक माह में तेजी देखने को मिल रही है। इनपुट कास्ट बढ़ जाने से इंडस्ट्री के लिए चुनौतियां पैदा हो रही है।

बात चीनी कोयले की करें, तो इसकी कीमत एक महीने में 35 रुपये से बढ़कर 53 रुपये किलो हो गई है, वहीं स्वदेशी झारखंड से आने वाले कोयले की लो ऐश की कीमत 20 से 33 रुपये प्रति किलो हो गई है। एक महीने में इतनी तेजी से आने से इंडस्ट्री को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम में परिवर्तन के साथ कोयले की खपत भी इन दिनों में बढ़ जाती है, ऐसे में अगर स्थिति काबू में न आई, तो कोयले की किल्लत का भी सामना करना पड़ सकता है।

सिंह कोल के एमडी मनिंदर पाल सिंह ने कहा कि कोयले के दामों में पिछले एक महीने से इजाफे का दौर जारी है। पिछले कई सालों से इतनी तेजी से बढ़ोतरी कभी नहीं हुई। चीन में आए संकट का असर भारत में भी दिखने लगा है। क्योंकि चीन से सप्लाई कम होने से दामों में इजाफा हो गया है। वहीं बात स्वदेशी कोयले की करें, तो इसके दाम भी डिमांड बढ़ने से बढ़ गए हैं। क्योंकि चीन का कोयला कम आने से स्वदेशी की मांग में इजाफा हो रहा है।

जग्गी कोल के जगजीत सिंह के मुताबिक इस समय मटीरियल की उपलब्धता कम हुई है, दामों में तेजी से इजाफा हो रहा है। अगर स्थिति जल्द ठीक न हुई, तो आने वाले दिनों में दामों में भारी तेजी देखने को मिल सकती है। सर्दियों में कोयले की मांग भी काफी बढ़ जाती है। लोहा यूनिट्स और ईंट भट्ठों का सीजन होने के चलते दाम ओर तेज हो सकते हैं।

 

Edited By: Vipin Kumar