समराला (लुधियाना)। चीन के बेजान फूलों ने भारतीय फूलों की खुशबू को बेअसर करके कारोबार को ठप कर दिया है। फूल उत्पादक मायूस हो कर खेती छोड़ रहे है और कुछ फूल उत्पादकों ने खेती करनी छोड़ दी है। चीन से फूल आने से पहले भारतीय फूलों की खेती करने वाले किसान खुश थे क्योंकि उनके फूलों के अच्छे दाम मिलते थे और इन किसानों को पंजाब यूनिवर्सिटी द्वारा ट्रेनिंग दी गई थी और इन बीज पर सब्सिडी भी थी।

किसानों ने लोन लेकर पॉलीहाउस में इसकी खेती करनी शुरू दी थी। इनके फूलों की कीमत सात रुपये से लेकर दस रुपये तक मिल रही थी। फूल मैरिज पैलेस, शादियों, मंदिरों, बुके और गुलदस्ते में प्रयोग किए जाते हैं। यह फूल पंजाब के फूल उत्पादकों द्वारा रेल द्वारा देहरादून और अन्य पंजाब से बाहर शहरों में भेजे जाते थे। अब वहां भी चीन के फूल जाने के कारण वहां के व्यापारियों ने भारतीय फूलों से मुंह मोड़ लिया है।

चीन से फूल आने के कारण भारतीय फूलों के कारोबार को नुकसान पहुंचना रहा है। चीन के बेजान प्लास्टिक के फूलों ने मैरिज पैलेस, शादियों की कारें, मंदिरों और गुलदस्तों में कब्जा कर लिया है क्योंकि यह फूल धोए भी जा सकते हैं। तीन एकड़ में लगाए थे तीन पॉलीहाउस भैणी साहिब के फूल उत्पादक लखविंदर सिंह का कहना है कि जहां इन फूलों को लेने के लिए उनके पास बुकिंग रहती थी अब उन फूलों को पूछने वाला कोई भी नहीं है। उन्‍होंने तीन एकड़ में तीन पॉलीहाउस बनाए हैं। जिसमें वह जर्बरा किस्म के फूल लगाते हैं।

फूल उत्पादक लखविंदर सिंह अपने पॉली हाऊस को दिखाते हुए।

उन्‍होंने कहा कि एक तरफ चीन के फूलों की मार और दूसरा पिछले दो साल से सरकार की ओर से 12 लाख सब्सिडी नहीं दिए जाने के चलते यह और घाटे का कारोबार बन गया है। इस कारण अब उन्होंने एक एकड़ से पॉलीहाउस हटाकर सब्जियां लगाने की तैयारी की है। घाटे का सौदा बना फूलों का कारोबार पिछले पांच साल से वह फूलों की खेती कर रहे हैं।

उन्‍होंने बताया कि एक एकड़ में पॉलीहाउस बनाने पर 34 लाख खर्च आता है जिसमें सरकार कुछ सब्सिड़ी देती है। वहीं एक एकड़ में फूलों की खेती पर खेती पर 24 लाख साल का खर्च आता है। उन्होंने बताया कि सारा खर्च निकालकर वे साल में एक एकड़ से करीब 9 लाख रुपये कमाते थे लेकिन आज चीन के फूलों की मार से वे घाटे में चले गए है। इसी कारण उन्होंने पॉलीहाउस में फूलों की खेती करनी बंद कर दी और फूलों की खेती से मुंह मोड लिया है।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि अगर फूलों की खेती करने वालों को बचाना है तो सरकार को चीन के फूलों को भारत में आने से बंद करना पड़ेगा। सजावट में एक ही बार काम आते हैं भारतीय फूल मैरिज पैलेस में फूलों की सजावट करने वाले गुरमीत सिंह ने बताया है कि चीन के फूलों पर एक बार ही पैसे लगाने पड़ते है और सजावट मे प्रयोग भारतीय फूल एक बार ही काम आते है और महंगे पड़ते हैं इसलिए उन्होंने इन फूलों को छोड़ कर चीन के फूलों को अपना लिया है। अगर कोई ग्राहक सजावट करने के लिए भारतीय फूलों की मांग करता है तो उसको खर्च के बारे मे बता दिया जाता है। सजावट करवाने वाला व्यक्ति ज्यादा खर्च से डरता हुआ चीन के फूल लगाने के लिए मांग करता है।

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