जेएनएन, श्री माछीवाड़ा साहिब : माछीवाड़ा का सरकारी अस्पताल डाक्टरों व स्टाफ की कमी के कारण पहले ही सुर्खियों में रहता है। बुधवार रात को अस्पताल में डिलीवरी के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई। इससे परिजनों में भारी रोष है। उन्होंने सरकार से इंसाफ की गुहार लगाई है।

गांव सैसोंवाल कलां के रमनदीप सिंह ने बताया कि पत्नी पूजा कुमारी छह साल बाद गर्भवती हुई। उसे डिलीवरी के लिए बुधवार रात नौ बजे सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया। रात 12 बजे उसे दर्द शुरू हो गई। तब अस्पताल में कोई डाक्टर नहीं था। पत्नी को स्टाफ नर्स व आशा वर्कर लेबर रूम में ले गई। पत्नी कई घंटे दर्द से तड़पती रही, परंतु डिलीवरी के लिए कोई डाक्टर नहीं पहुंचा। आखिर में डिलीवरी के दौरान बच्चा फंस गया तो बाहर से निजी डाक्टर बुलाया गया, जिसने बच्चे को बड़ी मुश्किल से निकाला। इस दौरान बच्चे की मौत हो गई।

छह साल ही दुआओं के बाद घर में गूंजनी थी किलकारी

रमनदीप ने बताया कि छह साल दुआएं मांगने के बाद घर में बच्चे की किलकारी गूंजनी थी, लेकिन सरकारी अस्पताल के घटिया प्रबंधों ने उनकी सारी खुशियां छीन लीं। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अस्पताल में डाक्टर ही नहीं और प्रबंध भी मुकम्मल नहीं हैं तो फिर वह पत्नी को निजी अस्पताल में रेफर कर देते। अस्पताल की लापरवाही के कारण उनके बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने कहा कि पंजाब सरकार बड़े-बड़े दावे करती है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज मुफ्त है और सभी सहूलियतें हैं, परंतु डाक्टर न होने के कारण मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा। फिर ऐसे अस्पताल खोलने का क्या फायदा। उन्होंने सरकार से मांग की कि उनके बच्चे की मौत के लिए जिम्मेदार स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई कर इंसाफ दिलाया जाए।

एसएमओ ने माना-सरकारी अस्पताल में डाक्टरों की कमी

एसएमओ डा. जसप्रीत कौर ने बताया कि यहां छह डाक्टरों की जरूरत है, लेकिन सिर्फ एक डाक्टर से काम चलाया जा रहा है। दूसरा डाक्टर समराला से ओपीडी के लिए आरजी तौर पर बुलाया गया है। बाद दोपहर तीन बजे से सुबह नौ बजे तक अस्पताल में इमरजेंसी के दौरान कोई डाक्टर तैनात नहीं रहता। अस्पताल में डाक्टरों और स्टाफ की कमी के लिए वह कई बार उच्च अधिकारियों को लिखित कर चुकी हैं, लेकिन फिर भी कोई हल नहीं हुआ।

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