जागरण संवाददाता, लुधियाना। पुलिस ने दुष्कर्म के आरोप में लोक इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष एवं लुधियाना के आत्म नगर हलके के विधायक सिमरजीत सिंह बैंस व छह अन्य के खिलाफ दर्ज केस में वीरवार को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में चार्जशीट दायर कर दी। 44 वर्षीय महिला ने विधायक पर दुष्कर्म के आरोप लगाए थे। अब तक इस मामले में किसी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हुई है। केस की सुनवाई 18 नवंबर को होगी। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हरसिमरनजीत सिंह की अदालत ने सात जुलाई 2021 को थाना डिविजन नंबर छह की पुलिस को इस मामले में एफआइआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।

विधायक बैंस ने इन आदेशों को पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने इस याचिका को रद कर दिया था और उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज हो गई थी। पिछले साल 16 नवंबर 2020 को महिला ने विधायक सिमरजीत सिंह बैंस, कमलजीत सिंह, बलजिंदर कौर, जसबीर कौर उर्फ भाभी, सुखचैन सिंह, परमजीत सिंह उर्फ पम्मा, गोगी शर्मा के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी। न्याय की मांग को लेकर वह कई दिन पुलिस कमिश्नर दफ्तर के बाहर धरना लगाकर बैठी रही थी। कोई कार्रवाई नहीं होने पर महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

न्यायिक मजिस्ट्रेट पलविंदर सिंह की अदालत महिला की दलीलों से सहमत नहीं थी। अदालत ने उसे सुबूत पेश करने के आदेश दिए थे। महिला ने इस आदेश पर एडिशनल सेशन जज राज कुमार गर्ग की अदालत में पुनर्निरीक्षण याचिका दायर की थी। वकील हरीश राय ढांडा और परमिंदर सिंह लड्डी की दलीलों से आश्वस्त होकर अदालत ने इस मामले में एफआइआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए थे।

आरोप : मदद का झांसा देकर कई बार किया दुष्कर्म

महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि संपत्ति के एक विवाद में वह विधायक बैंस के संपर्क में आई थी लेकिन फंस गई। उसे बार-बार फोन काल और वाट्सएप पर कई संदेश भेजे गए। बैंस ने उसकी आर्थिक कमजोरी का फायदा उठाकर मदद का झांसा दिया और कई बार दुष्कर्म किया। विधायक के भाई ने भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए कई बार काल की और वाट्सएप पर संदेश भेजे।

धारा 166 ए के तहत दायर याचिका अभी लंबित

याचिकाकर्ता का आरोप है कि शिकायत के बाद उसके भाई और पिता को फोन पर लगातार धमकाया गया। शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। विधायक को संरक्षण प्रदान किया गया। कुछ पुलिस अधिकारियों के कानून के अनुसार कार्रवाई नहीं करने के खिलाफ धारा 166-ए (लोक सेवक जानबूझकर कानून की अवहेलना) के तहत लगाई एक याचिका अभी अदालत में लंबित है।

Edited By: Vipin Kumar