पटियाला [सुरेश कामरा]। 'मुझे आज भी वो दिन याद आते हैं, जब मैं हॉकी की प्रैक्टिस करने जाती थी तो मेरे पास न तो स्पोट्र्स शूज होते थे और न ही हॉकी स्टिक। यह दोनों चीजें मुझे मेरे कोच बलदेव सिंह लेकर देते थे। तब मैं प्रैक्टिस करने के लिए अकादमी में जा पाती थी। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण मुझे अपने परिवार के साथ हाथ बंटाना पड़ता था, इसलिए मैं खेल के हिसाब से फिट नहीं रह पाती थी तो मेरे कोच मुझे अपने लुधियाना स्थित घर में परिवार के साथ रहने के लिए भेज देते थे। मैं वहां एक-एक महीने तक रहती थी, ताकि मेरी फिटनेस बनी रहे।' यह अनुभव भारतीय हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल ने शुक्रवार को पंजाबी यूनिवर्सिटी में दैनिक जागरण के साथ साझा किए।

कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में कस्बा शाहबाद मारकंडा की रानी रामपाल ने कहा कि उनके पिता रामपाल सिंह रेहड़ा चलाते थे। परिवार की वित्तीय स्थिति काफी कमजोर थी। गांव की शाहबाद हॉकी अकादमी की लड़कियां भारतीय टीम का हिस्सा थीं, जिसके कारण उसमें भी हॉकी खेलने का शौक जगा और उसने स्टिक उठा ली। कोच बलदेव सिंह ने उसमें हॉकी खिलाड़ी के गुण देखे और उसे तराशा।

भारतीय हॉकी टीम की कप्तान ने बताया कि जब वह अकादमी में प्रैक्टिस के लिए जाती थी तो डाइट में घर से दूध लेकर जाना जरूरी होता था, लेकिन रोजाना दूध लेकर जाना उसके लिए काफी मुश्किल था। इसलिए वह दूध में एक चौथाई पानी मिलाकर ले जाती थी, ताकि उसे अकादमी में प्रैक्टिस से बाहर न कर दिया जाए। ऐसी मुश्किलों को झेलते हुए उसने मौजूदा मुकाम हासिल किया है।

उनके परिवार में कोई और खिलाड़ी है के सवाल पर उन्होंने कहा कि नहीं। हॉकी खेल को ही क्यों चुना के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके कस्बे शाहबाद स्थित हॉकी अकादमी की बहुत सी लड़कियां भारतीय टीम का हिस्सा रही हैं तो उन्होंने भी हॉकी खेल को चुना। आज अपने प्रदर्शन के बल पर वह भारतीय हॉकी टीम की कप्तान हैं।

एस्ट्रोटर्फ मैदान की कमी पर जताई चिंता

देश में एस्ट्रोटर्फ मैदान की कमी पर ङ्क्षचता जताते हुए उन्होंने कहा कि हॉकी अब फास्ट गेम हो गई है, इसलिए एस्ट्रोटर्फ मैदान देश में और बढऩे चाहिए, तभी हॉकी खिलाडिय़ों के प्रदर्शन में और सुधार होगा।

17 से लगेगा बेंगलुरु में कैंप

रानी रामपाल ने कहा कि अब उसका ध्यान जुलाई 2020 में जापान के टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों में पदक जीतने पर केंद्रित है। ओलंपिक तैयारियों को लेकर 17 नवंबर से बेंगलुरु में हॉकी कैंप का आयोजन होने वाला है, जिसमें वह अपनी टीम के साथ शामिल होगी। इस कैंप के बाद ही भारतीय हॉकी टीम का एलान होगा।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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