जगराओं (लुधियाना), [बिंदु उप्पल]। दिव्यांग व्यक्ति अकेले भी हो तो उसके इधर-उधर जाने में परेशानी न हो, इसके लिए लुधियाना के गुरु नानक देव कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के बीटेक इलेक्ट्रीकल फाइनल ईयर के चार छात्रों ने रोबोटिक व्हीलचेयर डिवाइस बनाई है। इसकी मदद से तैयार व्हीलचेयर से दिव्यांग आसानी से इधर-उधर आ-जा सकेंगे। बीटेक इलेक्ट्रीकल के फाइनल ईयर के छात्र अमरदीप सिंह ने बताया कि पढ़ाई के दौरान हमें एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए कहा गया था, जोकि स्वास्थ्य से जुड़ा हो और ज्यादा लाभकारी हो। तब मैं और मेरे तीन दोस्तों अनिल कुमार, जसप्रीत सिंह और जसकरण सिंह ने इशारे पर काम करने वाला रोबोट बनाने का निर्णय लिया। फिर हमने असिस्टेंट प्रो. अरविंद ढींगरा व शिवानी अरोड़ा और ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर गगनदीप सिंह की देखरेख में व्हीलचेयर चलाने के लिए गेस्चर कंट्रोल्ड रोबोटिक डिवाइस तैयार किया। इससे संचालित व्हीलचेयर पर बैठकर दिव्यांग व्यक्ति इसे रिमोट कंट्रोल या हथेली पर लगे चिप के जरिये दाएं, बाएं, आगे और पीछे कर सकता है। इसमें किसी की मदद नहीं लेनी पड़ती है। यह डिवाइस करीब तीन हजार रुपये में तैयार किया जा सकता है।

रेन सेंसर भी बनाया है इन होनहारों ने

इन चारों छात्रों ने गोदामों में खुले में पड़े गेहूं और धान को भीगने से बचाने के लिए रेन सेंसर भी बनाया है। इस रेन सेंसर में बारिश के समय छत को खोला और बंद किया जा सकता है। इससे अनाज को भीगने से बचाया जा सकता है। रेन सेंसर में इनपुट-माइक्रो कंट्रोलर, प्रोग्रामिंग की है। बारिश होने पर आउटपुट जेनरेट होगी। इसमें डीवीडी राइडर से बनाई छत को बंद व खोला जा सकता है। इसमें माइक्रो-कंट्रोलर से पावर मिल जाती है। बकौल अमरदीप भविष्य में हम चारों दोस्त दोनों प्रोजेक्टों पर आधारित उत्पाद बनाकर बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं।

जसप्रीत सिंह ने तैयार की रोबोटिक व्हीलचेयर प्रोजेक्ट की फाइल

 

 

जसप्रीत सिंह ने बताया कि रोबोटिक गेस्चर प्रोजेक्ट में उसने प्रोजेक्ट फाइल तैयार की थी। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट से भविष्य में कई फायदे लिए जा सकते है। इसको मॉडीफाई कर कई एप्लीकेशन में प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा उसने वाटर लैवल इंडीकेटर प्रोजेक्ट भी तैयार किया है जिसमें आपको पता चल सकेगा कि आपके घर की पानी की टैंकी भरने वाली है और यह अपने आप बंद हो जाएगी। उसके पिता हरचरण सिंह ज्वेलर्स है और मां रणजीत कौर हाउस वाइफ हैं।

अपने आप बंद होने वाले नल पर भी काम किया है जसकरण ने

जसकरण सिंह ने बताया कि उसने इस प्रोजेक्ट के अलावा आॅटोमैटिक टैप ओरिएंटेशन पर भी काम किया था, जिसमें पानी प्रयोग करने के बाद नल अपने आप बंद हो जाएगा। इसके अलावा प्री-पेड एनर्जी मेट्रो प्रोजेक्ट पर भी उन्होंने काम किया। इसमें पहले मीटर को चार्ज करेंगे, फिर हम बिजली प्रयोग कर सकते हैं। उसके पिता जसविंदर सिंह रेलवे पुलिस लुधियाना में एएसआइ हैं। मां परमजीत कौर हाउस वाइफ हैं।

होनहार बीरवान: अमरदीप के पिता कारखाने में मैकेनिक

बीटेक इलेक्ट्रीकल कर रहा अमरदीप सिंह स्कूल में भी होनहार छात्रों में गिना जाता था। उसके दसवीं की बोर्ड परीक्षा में 87 प्रतिशत और बारहवीं में 77 प्रतिशत अंक थे। वह बीटेक के हर सेमेस्टर में टॉप थ्री में रहता है। कॉलेज से स्कॉलरशिप मिलती है। उसके पिता भगवंत सिंह एक कारखाने में मैकेनिक हैं। बहन सिमरणप्रीत कौर बीकॉम कर रही है।

पैरलल स्ट्रीट लाइट पर अनिल ने किया है काम

अनिल ने बताया कि उसने इस प्रोजेक्ट के अलावा पैरलल स्ट्रीट लाइट पर काम किया था, जिसमें एक बल्ब के जलाने से अन्य बल्ब साथ जल जाएंगे। एक इंडक्शन मोटर यूसिंग डाइट टिक पर काम किया था। उसे नई इनोवेशन करने में बहुत आनंद आता है। उसके पिता हिमाचल के सरकारी स्कूल में चपरासी और मां हाउस वाइफ हैं।

चारों छात्रों से काफी उम्मीदें

कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर अरविंद ढींगरा व शिवानी और ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर गगनदीप सिंह कहते हैं कि चारों छात्र अमरदीप, जसप्रीत, अनिल और जसकरण सिंह काफी होनहार हैं। इनसे काफी उम्मीदें हैं।

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Posted By: Sat Paul

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