लुधियाना, [दिलबाग दानिश] शहर के तलवंडी राय के रहने वाले एक युवक ने अपने तस्कर भाई को गिरफ्तारी से बचाने लिए अदालत में मौत का जाली सर्टिफिकेट दे दिया, मगर न तो उसका अंतिम संस्कार हुआ और न ही अंतिम अरदास। अदालत ने जब जांच करवाई को आरोपित तस्कर युवक जिंदा निकला। पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था। अब उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उसने यह सर्टिफिकेट कहां से बनवाया था। पुलिस ने उसके भाई को भी नामजद किया है, जिसने उसका सर्टिफिकेट अदालत में दिया था। जानकारी के अनुसार, थाना रायकोट पुलिस ने तलवंडी राय के हरपाल सिंह को 18 सितंबर 2017 को 400 नशीली गोलियों के साथ काबू किया था। उसके खिलाफ थाना रायकोट में मामला दर्ज किया गया था जो अदालत में विधाराधीन था। अदालत की चल रही कार्रवाई के दौरान उसने जमानत ले ली थी और कई तारीखों पर पेश भी नहीं हुआ।

इसी दौरान उसके भाई नरपाल सिंह ने आरोपित के वकील के जरिए कोर्ट में मौत का सर्टिफिकेट देते हुए बताया कि हरपाल की मौत हो गई है। इस पर जज ने शक जाहिर करते हुए एसएसपी जगराओं को इस पर रिपोर्ट देने को कहा था। इसकी जांच थाना रायकोट पुलिस से करवाई गई। इसमें पाया गया हरपाल जिंदा है और अब गांव में नहीं रहता है। जगराओं के एसएसपी द्वारा रिपोर्ट देने के बाद जज ने हरपाल और उसके भाई नरपाल सिंह के खिलाफ थाना डिवीजन नंबर पांच में 18 अगस्त 2018 को मामला दर्ज करवाया था। इसमें पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

पंचायत और ग्रामीणों के बयानों के बाद खुली पोल

पुलिस की ओर से हरपाल सिंह की मौत का पता लगाने के लिए गांव तलवंडी राय की पंचायत, ग्रामीणों और यहां तक कि श्मशानघाट के सेवादार के भी बयान दर्ज किए गए थे, क्योंकि अगर वह मरा है तो श्मशानघाट में संस्कार हुआ होगा और पंचायत अंतिम यात्रा में जरूर शामिल हुई होगी। मगर जांच में पता चला कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। इससे परिवार का झूठ पकड़ा गया।

सर्टिफिकेट कैसे बनवाया इसकी होगी जांच

पुलिस अब यह पता लगाने में लगी है कि जिंदा व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट कैसे बन गया। पुलिस ने हरपाल को गिरफ्तार कर लिया है, मगर उसकी सेहत सही नहीं होने के कारण उसे ज्यूडीशियल रिमांड पर भेज दिया गया है। उसके भाई नरपाल सिंह की गिरफ्तारी अभी बाकी है। जांच अधिकारी एएसआइ कुलदीप सिंह के अनुसार नरपाल को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जाएगी कि उसने यह सर्टिफिकेट कहां से और कैसे बनवाया था। जमीन बेचकर दूसरे गांवों में छिपता रहा हरपाल मामले के जांच अधिकारी एवं चौकी कोर्ट कांप्लेक्स एएसआइ कुलदीप सिंह के अनुसार हरपाल सिंह ने पुलिस से बचने के लिए अपने हिस्से की जमीन भी बेच दी थी। उसकी पत्नी बीमार थी और वह उसका इलाज करवाने के लिए फरीदकोट, फिरोजपुर समेत कई जिलों में भी छिपता रहा।

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