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अंग्रेजों के जमाने के मालखाने हुए खत्म, हर जिले का होगा सेंट्रलाइज्ड मालाखाना; केस प्रॉपर्टी का रखा जाएगा डिजिटल रिकॉर्ड

Published: Wed, 19 Aug 2026 03:34 AM (GMT+05:30)

पंजाब पुलिस ने अंग्रेजों के जमाने के मैनुअल मालखाना सिस्टम को खत्म कर दिया है। अब MMDT सिस्टम के तहत ...और पढ़ें

अंग्रेजों के जमाने के मालखाने हुए खत्म। फाइल फोटो

अंग्रेजों के जमाने के मालखाने हुए खत्म। फाइल फोटो

HighLights

  1. अंग्रेजों के जमाने का मैनुअल मालखाना सिस्टम खत्म।

  2. MMDTS से केस प्रॉपर्टी का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा।

  3. बारकोड ट्रैकिंग से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

गगनदीप रत्न, लुधियाना। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही पुलिस थानों में केस प्रापर्टी के मैनुअल रिकार्ड रखने की व्यवस्था अब जल्द खत्म होने जा रही है। पंजाब पुलिस की ओर से हर पुलिस जिले में बनाए गए सेंट्रलाइज्ड मालखानों में केस प्रापर्टी के रखरखाव और उसकी आवाजाही का पूरा रिकार्ड अब डिजिटल किया जाएगा।

इसके लिए मालखाना मैनेजमेंट एंड डिस्पोजल ट्रैकिंग सिस्टम (एमएमडीटीएस) तैयार किया गया है। सिस्टम की शुरुआत 15 अगस्त से की जा चुकी है। इससे केस प्रापर्टी की एंट्री से लेकर उसके निस्तारण तक हर प्रक्रिया की आनलाइन निगरानी हो सकेगी।

पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा के नेतृत्व में लुधियाना पुलिस में भी इस व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है। नई व्यवस्था के तहत थानों में केस प्रापर्टी को लंबे समय तक रखने की बजाय उसे निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद सेंट्रलाइज्ड मालखाने में जमा करवाना होगा। केस प्रापर्टी जमा करवाने के बाद उसकी डिजिटल एंट्री की जाएगी और प्रत्येक सामान को अलग पहचान दी जाएगी।

बार कोड से स्कैन करके ट्रैक कर सकेंगे अधिकारी

केस प्रापर्टी को बार कोड या क्यूआर कोड से जोड़ा जाएगा। इससे किसी भी केस की प्रापर्टी को एक क्लिक पर ट्रैक किया जा सकेगा। जिला और राज्य स्तर के अधिकारी भी इसकी आनलाइन निगरानी कर सकेंगे। किस समय केस प्रापर्टी मालखाने में जमा हुई?

किस अधिकारी ने उसे जमा करवाया? और बाद में उसे कब व किस उद्देश्य से निकाला गया? इसका पूरा रिकार्ड सिस्टम में उपलब्ध रहेगा। सेंट्रलाइज्ड मालखानों में केस प्रापर्टी को डबल-वाल्ट सील सिस्टम के तहत सुरक्षित रखा जाएगा और परिसर में सीसीटीवी निगरानी भी रहेगी।

विशेष रूप से नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे केस प्रापर्टी के साथ छेड़छाड़ किसी प्रकार की कमी की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने में आसानी होगी।

48 घटे में नहीं जमा करवाया तो देना होगा लिखित जवाब

नई व्यवस्था के तहत पुलिस थानों को केस प्रापर्टी 48 घंटे के भीतर सेंट्रलाइज्ड मालखाने में जमा करवानी होगी। इस अवधि में थाने में इन्वेंटरी तैयार करने और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

यदि किसी कारण से 48 घंटे के भीतर केस प्रापर्टी जमा नहीं हो पाती है तो संबंधित अधिकारी को देरी का लिखित कारण दर्ज करना होगा। एमएमडीटीएस के लागू होने से पारंपरिक मैनुअल रजिस्टर की जगह डिजिटल इन्वेंट्री तैयार होगी।

बारकोडिंग और क्यूआर कोड के माध्यम से प्रत्येक केस प्रापर्टी की पहचान होगी और उसकी आवाजाही का रियल टाइम रिकार्ड उपलब्ध रहेगा। अधिकारियों को एक क्लिक पर मालखाने की स्थिति और किसी भी केस की प्रापर्टी की जानकारी मिल सकेगी।

इस डिजिटल व्यवस्था से जवाबदेही बढ़ेगी और केस प्रापर्टी के रखरखाव में पारदर्शिता आएगी। साथ ही किसी सामान के गायब होने या रिकार्ड में गड़बड़ी की स्थिति में यह पता लगाना आसान होगा कि जिम्मेदारी किस स्तर पर थी। इससे पुलिस की जांच प्रक्रिया में भी अधिक पारदर्शिता आने की उम्मीद है।

क्या होगा फायदा

अकसर केस प्रापर्टी के मामलों में केस से संबंधित प्रापर्टी गायब या फिर चोरी होती रही है। ऐसे में नशा तस्करी और अन्य मामलों में आरोपितों को फायदा मिल जाता था। कई मामलों में तो पुलिस मुलाजिमों ने पैसे लेकर भी प्रापर्टी को गायब कर दिया।

लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि रजिस्टर की बजाए सारी डिटेल आनलाइन होगी। इसकी जिम्मेदारी एसीपी नार्कोटिकस की होगी, कि वहां जमा हो रही केस प्रापर्टी का रिकार्ड आनलाइन हो रहा है या नहीं? इससे अपराधियों को फायदा नहीं मिल पाएगा और सिस्टम पारदर्शी हो जाएगा।


--गगन