जागरण संवाददाता, लुधियाना। Breast Milk pump Bank: मां का दूध शिशु के लिए वरदान से कम नहीं होता है। मां का पहला पीला दूध नवजात को कई गंभीर बीमारियों से बचाता है। बहुत से नवजात मां के स्तन से दूध नहीं खींच पाते हैं। कई बार शारीरिक समस्याओं के कारण महिला को नवजात को स्तनपान करवाने में मुश्किल आती है। ऐसे में ब्रेस्ट मिल्क पंप काफी फायदेमंद होते हैं।

ब्रेस्ट मिल्क पंप की मदद से महिलाएं स्तन से दूध निकालकर नवजात को दे सकती हैं। सिविल अस्पताल में स्थित मदर एंड चाइल्ड अस्पताल में सूबे का पहला ब्रेस्ट मिल्क पंप बैंक स्थापित किया गया है। जो महिलाएं स्तन में दर्द की वजह से शिशु को दूध नहीं पिला पाती हैं उनके लिए मदर एंड चाइल्ड अस्पताल में स्थापित ब्रेस्ट मिल्क पंप बैंक फायदेमंद होगा।

बैंक का उद्घाटन एडीसी ने किया

शुक्रवार शाम को इस बैंक का उद्घाटन एडीसी विकास अमित कुमार पंचाल, सहायक कमिश्नर (यूटी) डा. हरजिंदर सिंह बेदी और पार्षद ममता आशु ने किया। बैंक में दो तरह के ब्रेस्ट मिल्क पंप की व्यवस्था की गई है। एक इलेक्ट्रिकल ब्रेस्ट मिल्क पंप व दूसरा मैन्युअल ब्रेस्ट मिल्क पंप है। मैन्युअल ब्रेस्ट मिल्क पंप को स्तन पर लगाकर मां अपने हाथों से पंप करती हैं, जिसके बाद दबाव की वजह से पंप से बोतल में दूध आने लगता है। इसी तरह इलेक्ट्रिकल ब्रेस्ट मिल्क पंप भी काम करता है।

प्रसूताओं को ब्रेस्ट मिल्क पंप की आदत नहीं डालनी चाहिए

अस्पताल में फिलहाल दो इलेक्ट्रिकल ब्रेस्ट मिल्क पंप हैं, जबकि मैन्युअल पंप की संख्या दस है। इसके अलावा 16 कंटेनर और एक स्टरलाइजर मुहैया करवाया गया है। मां के दूध को सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज भी है। डीएमसी अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. कनुप्रिया जैन का कहना है कि प्रसूताओं को ब्रेस्ट मिल्क पंप की आदत नहीं डालनी चाहिए। डायरेक्ट ब्रेस्ट फीड करना आसान होता है। चिकित्सक के परामर्श के अनुसार पंप जितने दिन जरूरत हो तब तक ही इस्तेमाल करना चाहिए। शिशु अगर सीधे दूध पीएगा तो अच्छा रहेगा। पंप के जरिये बोतल में दूध निकालकर पिलाने के दौरान सफाई का ध्यान न रखने पर इंफेक्शन का खतरा भी हो सकता है।

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