लुधियाना, जेएनएन। थानों में से रजिस्टर कल्चर धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। डीडीआर को कंप्यूटर पर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने के साथ-साथ अब बदमाशों की हाजिरी भी डिजीटल ढंग से लगेगी। इसके लिए थानों में बाकायदा बायोमीटिक मशीन लगाई जानी हैं। सात सौ अपराधियों की लिस्ट तैयार की गई है और उनके फिंगर पिंट्र लेने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पिछले समय के दौरान शहर में हुई लूट की वारदात के दौरान जब पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि कुछ ऐसे आरोपित हैं जो बार-बार वारदात को अंजाम देते हैं और थाने में निरंतर हाजिरी नहीं देते, जिसके बाद पुलिस ने उन आरोपितों का डाटा एकत्र किया है जो बार-बार क्राइम करते हैं। थाना स्तर पर इसकी लिस्ट बन चुकी हैं और इन आरोपितों को थाने में आकर अपनी फिंगर पिंट्र डाटा देने को कहा गया है। इसमें कुछ समय लग सकता है।

पहले रजिस्टर पर मात्र दस नंबरियों की लगती थी हाजिरी

पुलिस बार-बार क्राइम करने वाले आरोपितों को दस नंबरी घोषित कर देती है, जिसे रोजाना थाने में आकर रजिस्टर पर हाजिरी देनी होती है। अगर वह शहर छोड़कर जाता भी है तो इसकी जानकारी भी लिखित में थाने को देनी होती है। जांच में सामने आया है कि इस दौरान ही ज्यादातर दस नंबरी अपनी कई-कई दिन की हाजिरी रजिस्टर में लगा जाते हैं और बाद में कहीं और जाकर क्राइम भी करते हैं। यही नहीं रुटीन में गैर हाजिर होने वालों पर पुलिस आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।

बायोमीटिक से नहीं मार सकेंगे बंक

अब हर थाने में बायोमीटिक मशीन लगेगी, जिसमें उस एरिया के दस नंबरियों के फिंगर पिंट्र का डाटा सेव रहेगा। हाजिरी लगाने के लिए आरोपित को कहीं भी इसकी जानकारी नहीं देनी होगी, बल्कि यह हाजिरी रोजाना चेक होगी किसी का मिस पंच होता है तो उससे जवाब तलबी होगी।

बेल पर आने के बाद थाने में देनी होगी जानकारी

जेल से जमानत पर और सजा काटकर आने वाले आरोपितों संबंधी जेल प्रबंधन पुलिस को रोजाना लिस्ट देता है। जेल प्रबंधन यह भी सुनिश्चित करेगा कि कोई भी आरोपित वहां से जाने से पहले यह बताएगा कि उसका फिंगर पिंट्र डाटा पुलिस के पास है या नहीं। अगर डाटा है तो ठीक नहीं तो उसे पहले डाटा देना होगा और वह बाद में घर जा सकेगा।रजिस्टर पर हाजिरी में आरोपितों के पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर गच्चा देने वाली बाते सामने आई है, जिसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है कि दस नंबरियों की बायोमीटिक से हाजिरी लगेगी।

काम चल रहा है। सात सौ ऐसे मुजरिम हैं जो बार-बार क्राइम करते हैं। इससे इन पर नजर रखना और भी आसान होगा और कार्रवाई के डर से वह रोजाना थाने में हाजिरी भी देंगे।

राकेश अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर

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Posted By: Vikas Kumar

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