राजेश शर्मा, लुधियाना

सरकारी कर्मियों पर अगर डंडा चले या उनको जगाने के लिए कोई ऐसा कदम उठाया जाए कि जिससे हर कोई हिल जाए तो ही वे तुरंत काम करते हैं। कुछ ऐसा ही वाक्या मिनी सचिवालय में हुआ है।

दरअसल, मामला शुक्रवार शाम का है। पिता की मौत के बाद सरकारी रिकॉर्ड में किसी और के नाम पर दर्ज मकान की विरासत रिपोर्ट ठीक करवाने के लिए सलेमटाबरी मोहल्ला पीरुबंदा का 30 वर्षीय विपिन पिछले 6 साल से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहा था। काम नहीं होने से परेशान होकर विपिन ने मिनी सचिवालय स्थित एसडीएम पूर्वी के कार्यालय में अपनी मां की चुनरी गले से बांधकर अदालत के पंखे से लटक गया। वहां उपस्थित एसडीएम के गनमैन ने फुर्ती दिखाते हुए विपिन को उसकी टांगों से पकड़कर नीचे उतार लिया। इस घटनाक्रम से कार्यालय के कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए। फिर वहां तुरंत सभी दस्तावेज तैयार कर विपिन को थमाते हुए उसे उसकी मां के साथ भेज दिया गया। इसके बाद कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।

पटवारी बोला, पता कर लो तुम्हारे बाप ने दो शादियां तो नहीं की : विपिन

2001 में पिता की मौत हो गई थी। 2012 में पता चला कि पीरुबंदा स्थित 100 गज के हमारे मकान को किसी और के नाम पर चढ़ा दिया गया। मैंने पटवारी से संपर्क किया तो वह कहने लगा कि पता कर लो तुम्हारे बाप ने दो शादियां तो नहीं की थी। इसके बाद पटवारी, कानूनगो कार्यालय के चक्कर के बाद मैं एसडीएम कार्यालय पहुंच गया। यहां भी कर्मचारी मुझे भगाते ही रहे। कभी सेवा केंद्र भेज देते तो कभी कानूनगो के पास। अब मैं क्या करता। 8 हजार रुपये की नौकरी करता हूं। रोज रोज मालिक से छुट्टी मांगने में मुझे शर्म आती है। शुक्रवार को भी कर्मचारी मुझे भगाते रहे। मैंने अपनी मां की चुनरी को फंदा बनाया और एसडीएम ऑफिस में ही पंखे से लटक गया। गनमैन ने मुझे नीचे उतार लिया। पहले तो मुझे कर्मचारी पर्चा दर्ज करवाने की धमकी देने लगे। मैंने कहा मैं तो 6 साल से पहले ही मर रहा हूं। आप करवा दो पर्चा दर्ज। जिस काम के लिए मुझे कई वर्षो से दौड़ाया जा रहा था। वह 15 मिनट में तैयार करके मुझे दस्तावेज दे दिए। एसडीएम साहब ने सभी कर्मचारियों को कह दिया कि इसका काम तुरंत करो। किसी से शिकायत नहीं मिलनी चाहिए।

जैसा कि विपिन ने बताया

---------------- मुझे इसकी जानकारी नहीं : एसडीएम

नहीं ऐसी कोई घटना मेरे कार्यालय में नहीं हुई है। किसी आवेदक ने फंदा लगाया ऐसी मुझे कोई जानकारी नहीं है।

-अमरजीत सिंह बैंस, एसडीएम पूर्वी

Posted By: Jagran