लुधियाना [राजेश शर्मा]। अपनी कारगुजारी की वजह से अकसर सुर्खियों में रहने वाला रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीए) कार्यालय एक बार फिर से चर्चा में हैं। इस बार तो बेहद चौंकाने वाला वाक्या सामने आया है। दरअसल, चालान भुगतान काउंटर पर तैनात कर्मचारी दस्तावेज देखकर खुद ही चालान राशि पांच हजार से कम करके एक सौ रुपये कर रहा है जबकि सेक्रेटरी रीजनल ट्रांसपोर्ट का कहना है कि मोटर व्हीक्ल एक्ट संशोधन के बाद ऐसा प्रावधान ही नहीं है।

हुआ यूं कि रांची कॉलोनी निवासी सूरज कुमार के बाइक का चालान सराभा नगर चौंक में हुआ। मौके पर वह ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, इंश्योरेंस और प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं दिखा पाया। पुलिस ने उसका बाइक थाने में बंद कर दिया। सोमवार को सूरज आरटीए कार्यालय में चालान का भुगतान करने के लिए आया। वह अपने साथ इंश्योरेंस, ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी भी लेकर आया। वहां उसे एक एजेंट मिला। उसने सूरज से कुल 11 हजार रुपये वसूल लिए। चालान का भुगतान भी हो गया लेकिन रसीद दी सिर्फ 5300 रुपये की। यह देख उसके पांव तल जमीन खिसक गई। उसे कुछ समझ नहीं आया। फिर चालान काउंटर पर क्लर्क से पूछा तो बताया कि उसने अन्य दस्तावेजों के साथ प्रदूषण सर्टिफिकेट देखकर चालान राशि कम कर 100 रुपये ही ली गई है। उसे 5300 रुपये ही दिए गए जिसकी रसीद जारी की गई है। बाकी कम पैसों के बारे में वह एजेंट ही बता सकता है।

न डीएल था और न ही प्रदूषण सर्टिफिकेट: आवेदक

आवेदक सूरज ने इसकी शिकायत एटीओ केसर सिंह से की तो उनसे जवाब मिला कि आप शिकायत पुलिस में दर्ज करवाएं। सूरज ने कहा कि उसने एजेंट को बाइक की आरसी, इंश्योरेंस ही दिया था। उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस और प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं था। एजेंट ने उससे 11 हजार रुपये लिए और 5300 रुपये की रसीद दी।

मामले की जांच होगी: सेक्रेटरी आरटीए

आरटीए सेक्रेटरी दमनजीत सिंह मान ने कहा कि मोटर व्हीक्ल एक्ट में संशोधन के बाद दस्तावेज दिखाकर कम होने वाले जुर्माने का प्रावधान खत्म हो गया है। कैसे जुर्माना राशि कम की गई, इसकी जांच की जाएगी। गलती आवेदक की भी है। उसे सीधे चालान काउंटर पर भुगतान करना चाहिए था न कि एजेंट के माध्यम से। मुझे दस्तावेज दीजिए जो भी कर्मचारी दोषी होगा उस पर सख्त कार्रवाई होगी।

चालान काउंटर पर 5300 का ही भुगतान हुआ: क्लर्क

चालान काउंटर पर के क्लर्क चमकौर सिंह से जब बात की तो उसने कहा कि ओरिजनल दस्तावेज दिखाने पर जुर्माना राशि कम की थी। मुझे 5300 रुपये का ही भुगतान किया गया और उतने की ही रसीद जारी की गई। एजेंट को कितनी राशि दी, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। दस्तावेजों में प्रदूषण सर्टिफिकेट भी लगा था।

यह हुआ खेल

एजेंट ने सूरज से 11 हजार रुपये लिए। उसके चालान का भुगतान 10,200 रुपये बनता था, 800 रुपये एजेंट ने अपनी फीस ली। फिर एजेंट ने सूरज से बाइक की आरसी, इंश्योरेंस ली। हालांकि डीएल और प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं था। एजेंट ने जाली प्रदूषण सर्टिफिकेट बनवाकर लगाया और फिर सूरज से ली आरसी, इंश्योरेंस और अपना बनवाया जाली प्रदूषण सर्टिफिकेट उसे चालान काउंटर पर क्लर्क को दिखाकर 5300 रुपये भुगतान कर रसीद ले ली। इसमें 5 हजार रुपये ड्राइविंग लाइसेंस न होने की जुर्माना फीस और बाकी अन्य दस्तावेज दिखाकर 100-100 रुपये भर गए।

अब ये उठ रहे बड़े सवाल

सवाल -1

आरटीए सेक्रेटरी का कहना है कि अब मोटर व्हीक्ल एक्ट में संशोधन होने से दस्तावेज दिखाकर कम होने वाले जुर्माने का प्रावधान खत्म कर दिया गया है। इस तरह जुर्माना राशि कम नहीं हो सकती। फिर क्लर्क ने रसीद जारी कैसे की। अब सही कौन है।

सवाल -2

चालान काउंटर पर मौजूद चमकौर सिंह का कहना है कि उसने ओरिजनल दस्तावेज दिखाने पर जुर्माना राशि कम की थी। 5300 रुपये का भुगतान कर रसीद जारी की गई। दस्तावेजों में आरसी, इंश्योरेंस और प्रदूषण सर्टिफिकेट लगा था। जब प्रावधान ही खत्म तो दस्तावेज देखने का सवाल ही नहीं। पूरा जुर्माना क्यों नहीं लिया।

सवाल-3

मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के बाद आरटीए चालान काउंट का सॉफ्टवेयर अपडेट हो चुका है। फिर सिस्टम में क्लर्क की ओर से डीएल नहीं होने की जुर्माना फीस के साथ 100-100 रुपये कैसे जमा हो गए। क्या सिस्टम में सेंध लगाई गई है।

एक्ट में संशोधन से पहले कम होता था जुर्माना

मोटर व्हीकल एक्ट के संशोधन से पहले यह व्यवस्था थी कि जब वाहन चालक चेकिंग के दौरान मौके पर दस्तावेज नहीं दिखा पाया तो चालान भुगतान से पहले वह सेक्रेटरी आरटीए को दस्तावेज दिखाकर जुर्माना राशि कम करवा सकता है। मसलन अगर आवेदक मौके पर ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिखा पाया तो पुलिस अधिकारी उसका पांच हजार जुर्माना राशि का चालान काट देगा। चालान भुगतान से पहले अगर वह सेक्रेटरी आरटीए को अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिखा देता है तो जुर्माना राशि कम करके एक सौ रुपये हो जाती है।

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