लुधियाना, [आशा मेहता]। World Hepatitis Day 2021: पंजाब में हेपेटाइटिस सी तेजी से बढ़ रहा है, जिसे लेकर विशेषज्ञ चिंतित है। बीमारी की समय पर पहचान न होना और देरी से इलाज शुरू होने की वजह से मरीज मौत के मुंह में जा रहे हैं। डब्ल्यूएचओ की ओर से हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाया जाता है, जिससे की हेपेटाइटिस बीमारी को लेकर जागरूकता आ सके।

पंजाब में छह फीसदी लोग हेपेटाइटिस सी की चपेट में

फोर्टिस हॉस्पिटल लुधियाना के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी व हेपेटोलॉजी विभाग के एडिश्नल डायरेक्टर डॉ. नितिन बहल ने कहा कि पंजाब में छह फीसदी लोग हेपेटाइटिस सी की चपेट में है। जिससे पंजाब को हेपेटाइटिस सी की राजधानी भी कहा जाता है। इसका कारण यह है कि लोगों का खानपान अब सही नहीं है। पूरी दुनिया में हर 30 सेकेंड में एक व्यक्ति हेपेटाइटिस के कारण मौत के मुंह में समा रहा है। कोरोना काल के दौरान भी इसके इलाज का इंतजार नहीं किया जा सकता। बिना जांच किए मरीज को ब्लड चढ़ाने, असुरक्षित सर्जरी और असुरक्षित टीकों के कारण हेपेटाइटिस सी की बीमारी होती है। हेपेटाइटिस ए और बी की रोकथाम के लिए तो वैक्सीन उपलब्ध है, मगर हेपेटाइटिस सी की रोकथाम के लिए फिलहाल कोई टीका उपलब्ध नहीं है।

लोगों को बीमारी के बारे जागरूक करने की जरूरत

वहीं फोर्टिस अस्पताल लुधियाना के जोनल डायरेक्टर डॉ. विश्वदीप गोयसल ने कहा कि जब ज्यादा से ज्यादा लोग जांच और इलाज के लिए आगे आएंगे, तभी इस बीमारी का खात्मा हो सकेगा। पंजाब को हेपेटाइटिस मुक्त करने का सपना जल्द ही पूरा होगा। गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. राजू सिंह छीना ने कहा कि लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक करने के लिए फोर्टिस अस्पताल सरकार व एनजीओ के साथ काम कर रहा है। ताकि पंजाब की धरती से इस बीमारी को खत्म किया जा सके। लुधियाना के आसपास कई जिले और क्षेत्र ऐसे हैं, जहां 25 फीसदी लोग इस बीमारी की चपेट में हैं।

पीड़िताें काे जल्द करवाना चाहिए इलाज

डॉ. बहल ने कहा कि हेपेटाइटिस से पीड़ित लोग लाइफ सेविंग ट्रीटमेंट का इंतजार नहीं कर सकते तथा उन्हें जल्द ही इलाज शुरू कराना चाहिए। गर्भवती महिलाएं अगर समय से अपनी जांच कराएं तो उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को इस बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है। डॉ. छीना ने कहा कि देश के नेताओं और नीति निर्धारकों को अब हेपाटाइटिस को जड़ से खत्म करने की नीति तैयार करने के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए। इस बीमारी की चपेट में फंसे हर बच्चे और बड़े का जीवन देश की अमानत है और इसे बचाने के लिए इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

फिजिकली एक्टिविटीज कम होना बड़ा कारण

एजीआइ हॉस्पिटल के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. निर्मलजीत सिंह मल्ही कहते हैं कि लगातार बदल रहे लाइफ स्टाइल और गलत खानपान की वजह से लिवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। क्योंकि लोग अबऑयली फूड, फास्ट फूड, धूम्रपान, नशीली दवाएं, शराब का सेवन अधिक कर रहे हैं। दूसरा लोगों की फिजिकली एक्टिविटीज कम हो गई है। मोटापा, शुगर, उच्च कोलेस्ट्रोल, पीसीओडी, वजन व मांसपेशियां बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सप्लीमेंट्स भी लिवर की बीमारी के कारण बन रह हैं।

कम चिकनाई वाला भोजन खाएं

लिवर रोगों में क्रोनिक हेपेटाइटिस, सिरोसिस, अल्कोहल लिवर डिजीज, फैटी लिवर रोग, लिवर ट्यूमर, हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, ई शामिल है। कम चिकनाई वाला भोजन, वजन घटाकर, डायबिटीज कंट्रोल व कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने से इलाज में मदद मिलती है। डॉ. मल्ली ने कहा कि लिवर की बीमारियों से बचने के लिए फास्ट फूड, ऑयली फूड लेने से बचना चाहिए। शारीरिक गतिविधियों को बढ़ना चाहिए, डायबिटीज और कैलोस्ट्रोल को कंट्रोल में रखना चाहिए। इसके साथ ही शराब व नशीली दवाओं से परहेज रखकर लिवर के रोगों से बचा जा सकता है।

 

Edited By: Vipin Kumar