लुधियाना [मुनीश शर्मा]। वर्ष 1984 में पंजाब के बिगड़े हालात के दौरान काम करने के तौर-तरीकों में बदलाव किया था। अब कोरोना संकट ने एक नई दिशा में अग्रसर कर दिया है। समय-समय पर काम करने का तरीका बदलता है और अब डिजिटल का दौर है। इसके बिना आने वाले कल में कारोबार की कल्पना नहीं की जा सकती है। न्यू डीएमसीएच के सामने स्थित पायल ड्रग स्टोर के मालिक राजीव सोनी का कहना है कि अगर हमें समय के साथ चलना है तो डिजिटल का कांसेप्ट तेजी से अपनाना होगा। कोविड संकट ने डिजिटल की अहमियत को बयां कर दिया है। राजीव ने वर्ष 1980 में किराये की दुकान से अपने सफर का आगाज किया था। उन्होंने ग्राहकों की संतुष्टि को सबसे आगे रखकर उनके साथ विश्वास का रिश्ता कायम किया। 10 साल पहले उन्होंने अपनी खुद की दुकान खोल ली। 

खुद को डिजिटल स्टोर के रूप में स्थापित करेंगे

वह बताते हैं कि कोरोना काल में पूर्ण बंद के बावजूद डिजिटल माध्यम से कामकाज करके मरीजों तक दवाएं पहुंचाईं। अब हमारा स्टोर खुद को डिजिटल स्टोर के रूप में भी स्थापित करेगा। लुधियाना के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ग्राहकों पर भी फोकस किया जाएगा ताकि उन्हें दवाइयां लेने के लिए लुधियाना या किसी बड़े शहरों में न जाना पड़े। घर बैठे की अॉनलाइन आर्डर के जरिए वे दवाएं प्राप्त कर सकेंगे। हमारी मोबाइल एप लाने की भी योजना है।

वाट्सएप और सोशल साइट्स लिए दवाओं के आर्डर

वह बताते हैं कि कोरोना संकट ने उनके काम करने के तौर-तरीके बदल दिए हैं। कर्फ्यू और लाकडाउन लगने के बाद ग्राहकों ने वाट्सएप, सोशल नेटवर्किंग साइट्स और विडियो कालिंग के जरिए उन्हें आर्डर दिए। सबसे ज्यादा समस्या ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को हो रही थी। ऐसे में जिला प्रशासन के सहयोग से 25 गावों के सरपंचों के साथ संपर्क साधा। उन्होंने गुरुद्वारा साहिब में अनाउंसमेंट करवाई कि जिन्हें भी दवाएं चाहिए वे सरपंच को बताएं। फोन पर डाक्टर की पर्ची मिलने के बाद सरपंच के माध्यम से घर-घर दवाइयां पहुंचाई गईं।

 

 

 

 

 

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