लुधियाना, जेएनएन। पंजाब में अब तक पिछले साल के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा पराली जल चुकी है। इससे काेराेना के मामले बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञाें ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि राज्य में पराली जलाई गई ताे महामारी बढ़ सकती है। इस पर काबू पानी सेहत विभाग के लिए अासान नहीं हाेगा। पिछले साल पिछले साल 19 अक्टूबर तक 2141 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा 7105 तक पहुंच गया है।

नवांशहर में सबसे ज्यादा 176 मामले अाए सामने

सोमवार को नवांशहर में सबसे ज्यादा 176, जबकि फाजिल्का में 126 जगह पराली जलाई गई। अमृतसर की एक्यूआइ वैल्यू 153 रही। वहीं, बठिंडा में यह आंकड़ा 106, चंडीगढ़ में 100, जालंधर में 143, खन्ना में 146, मंडी गोबिंदगढ़ में 141, पटियाला में 152 व रूपनगर में 142 दर्ज किया गया।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मुहिम का किया था आगाज 

इससे पहले पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन प्रो. एसएस मरवाहा ने किसानों को पराली जलाने से रोकने और वातावरण को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए खेहरा बेट में एक मुहिम का आगाज किया था। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से सेहत संबंधी समस्याएं पैदा हो रही है। खासकर कोविड संकट के दौरान इससे खतरा बहुत बढ़ रहा है।

इस दौरान पराली को कभी न जलाओ, वातावरण को साफ सुथरा बनाओ स्लोगन का ब्रोशर भी लांच किया था।उन्होंने किसानों को अपील की कि पराली जलाने से रोकना समय की आवश्यकता है। डीसी ने किसानों को पराली न जला कर पर्यावरण को बचाने की अपील की थी। 

 

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