जासं. लुधियाना :

लंपी संक्रमण पशुओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। पशु पालन विभाग के अनुसार जिला लुधियाना में शुक्रवार तक संक्रमित पशुओं का आकंड़ा एक हजार तक पहुंच चुका है। जबकि इस संक्रमण से 197 पशुओं की मौत हो चुकी है।

सूत्रों की माने तो संक्रमण की संख्या कहीं इससे ज्यादा है और इस संक्रमण के कारण मरने वाले पशुओं का आकंड़ा भी इससे ज्यादा है। शहर में लंपी के चलते मर रहे पशुओं को दफनाना की एक समस्या बन चुकी है, क्योंकि निगम की तरफ से इसका कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है।

गौरतलब है कि इस समय पशुओं में लंपी संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हालांकि पशु डेयरी संचालक बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए दवा का इस्तेमाल कर रहे है। लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी सड़कों पर घूम रहे बेसहारा जानवरों की है। एक अनुमान के अनुसार महानगर की सड़कों पर इस समय चार हजार जानवर घूम रहे है। जो कि इस संक्रमण की चपेट में आ रहे है। बुधवार को हैबोवाल डेयरी कांप्लेक्स में 30 जानवरों की मौत हुई है, हालांकि इस बात की पुष्टि करने के लिए कोई तैयार नहीं है कि यह लंपी की चपेट में आने से मरे या फिर किसी अन्य कारण। मृत जानवरों को उठाने की सबसे ज्यादा दिक्कत लोगों को आ रही है। क्योंकि 18 करोड़ की लागत से गांव रसूलपुर में तैयार कारकस प्लांट अभी तक नहीं चला है। ऐसे में सतलुज दरिया के किनारे चल रही अवैध हड्डा रोडी पर मृत जानवरों को ठिकाने लगाने का काम चल रहा है।

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जून 2021 से चलने के इंतजार में कारसक प्लांट

यहां बता दे कि स्मार्ट सिटी के तहत निगम ने कारकस प्लांट तैयार करने की योजना तैयार की थी। साल 2019 में पीपीपी मोड पर इस प्लांट के तैयार करना शुरू किया गया था। इसमें 79 प्रतिशत पैसा निगम और 21 प्रतिशत पैसा कंपनी की तरफ से लगाया गया है। जून 2021 को 18 करोड़ की लागत से यह प्लांट तैयार हो चुका है। 13 जुलाई 2021 को तत्कालीन मंत्री भारत भूषण आशु इस प्लांट का उद्घाटन करने गए थे, लेकिन गांव वासियों के विरोध के कारण प्लांट शुरू नहीं हो सका।

पांच एकड़ में बने उक्त प्लांट में प्रतिदिन 150 मृत जानवरों के शवों का निष्पादन किया जा सकता है। इसमें बड़े जानवरों को ही लाया जाता है। उनके चमड़े को आगे कंपनियों को बेचा जा सकता है। शेष को बायो फर्टिलाइजर के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है। प्लांट को तैयार करने वाली एसडी कंपनी ने इसे सात साल चलाना है। निगम को प्रति माह एक लाख रुपये देने है। बाकी सारा खर्च कंपनी की तरफ से वहन किया जाएगा। सात साल के बाद यह प्लांट निगम के हवाले किया जाना है।

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मृत पशुओं के शवों को दफन करना बड़ी समस्या है, क्योंकि अभी कारकस प्लांट को शुरू नहीं किया जा सका है। इसके लिए निगम गांव वासियों को समझाने का प्रयत्न कर रहा है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक प्लांट को शुरू हो जाएगा। सड़कों पर घूमने रहे बेसहारा जानवरों में रोकथाम करना मुश्किल पड़ रहा है।

बलकार संधू, मेयर लुधियाना

Edited By: Jagran