लुधियाना, जेएनएन। नगर निगम की ओएंडएम ब्रांच ने शहरवासियों से करीब तीन सौ करोड़ रुपये से अधिक की वसूली करनी है, जो निगम के लिए आसान नहीं है। मेयर बलकार सिंह संधू ने पदभार संभालते ही वाटर सीवरेज के बिल सेटल करने के लिए एक कमेटी बनाई थी, लेकिन वाटर सीवरेज के बिल जमा करवाने के लिए तब भी ज्यादा लोग सामने नहीं आए।

अब नगर निगम के एडीशनल कमिश्नर ऋषिपाल सिंह ने वसूली के लिए वाटर सीवरेज कनेक्शनों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी। अवैध तरीके से वाटर सीवरेज कनेक्शन चलाने वाले लोगों को निगम की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। नगर निगम अब प्रॉपर्टी टैक्स और वाटर सीवरेज के रिकार्ड को आपस में मैच करेगा। इस दौरान दोनों के रिकार्ड में किसी भी तरह का अंतर पाया गया तो खपतकार को निगम जुर्माना ठोकेगा।

यहां तक कि अगर खपतकार ने जुर्माना जमा नहीं किया तो उसकी प्रॉपर्टी सील कर दी जाएगी। नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए ओएंडएम ब्रांच को 100 करोड़ रुपये वसूलने का लक्ष्य दिया था, जबकि ब्रांच अभी तक आधा लक्ष्य भी हासिल नहीं कर पाई। ब्रांच के अफसर उच्च अधिकारियों को फीडबैक देते रहे कि लोगों के पास समय पर बिल नहीं पहुंच रहे, जिसकी वजह से खपतकार पानी सीवरेज के बिल जमा नहीं करवा पा रहे।

एडीशनल कमिश्नर ऋषिपाल सिंह ने जोन ए में चारों जोन के अफसरों की बैठक बुलाई और सीवरेज वाटर के पेंडिंग बिलों की वसूली पर चर्चा की। एडीशनल कमिश्नर ने कहा कि प्रत्येक जोन से सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स देने वाले पांच-पांच हजार प्रॉपर्टी मालिकों का रिकार्ड निकाला जाए और उसके बाद उसका मिलान वाटर सीवरेज के रिकार्ड से करें। देखें कि क्या खपतकार ने प्रॉपर्टी टैक्स में दर्ज रकबे को पानी सीवरेज में दर्ज रकबे के बराबर लिखा है या नहीं। इसके अलावा कमर्शियल प्रोपर्टी में वाटर सीवरेज कनेक्शन घरेलू है या कमर्शियल।

31 जनवरी 2020 तक बिल जमा करवाने वालों को मिलेगी 10 छूट

एडीशनल कमिश्नर ने बिल डिस्ट्रीब्यूटरों को हिदायतें दी हैं कि 15 दिसंबर तक सभी खपतकारों को बिल पहुंचाए जाएं और उन्हें जल्द बिल जमा करवाने को कहें। एडीशनल कमिश्नर ने बताया कि अब लोगों को सालाना पानी सीवरेज के बिल भेजे जाने हैं। जो लोग 31 जनवरी 2020 तक वाटर सीवरेज के बिल जमा करवाएंगे उन्हें 10 फीसद की छूट दी जाएगी।

रजिस्टर में डाटा तैयार करेंगे बिल

डिस्ट्रीब्यूटर  बार-बार शिकायत करते रहे हैं कि उन्हें बिल नहीं मिलते जिसकी वजह से वह सीवरेज पानी के बिल जमा नहीं करवा पाते। एडीशनल कमिश्नर ने बिल जमा करवाने की जिम्मेदारी अब बिल डिस्ट्रीब्यूटरों को सौंप दी है और उनकी जिम्मेदारी तय की है। उन्होंने साफ कर दिया कि अगर किसी खपतकार से बिल न मिलने की शिकायत आती है तो बिल बांटने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एडीशनल कमिश्नर ने बताया कि बिल डिस्ट्रीब्यूटर घर घर जाकर लोगों को बिल देंगे और उस दौरान उनसे मोबाइल नंबर, प्रॉपर्टी टैक्स आईडी, यूआइडी नंबर व अन्य जानकारी लेंगे। इसके लिए सभी डिस्ट्रीब्यूटरों को एक एक रजिस्टर सौंपे जाएंगे। नगर निगम में बिल बांटने के लिए 80 के करीब बिल डिस्ट्रीब्यूटर हैं और अब बिल्डिंग ब्रांच के सेवादारों को भी इस काम में लगाया जाएगा।

सुपरिंटेंडेंट रोज करेंगे 100 फोन

डिस्ट्रीब्यूटर जो डाटा तैयार करेंगे हर जोन के सुपरिंटेंडेंट उसमें से 100 खपतकारों को फोन करेंगे और बिल मिलने की पुष्टि करेंगे। यही नहीं क्रॉस चेक करने के लिए एडीशनल कमिश्न खुद प्रत्येक जोन के 20-20 लोगों को फोन करेंगे और बिल के संबंध में जानकारी हासिल करेंगे। इसका पूरा डाटा तैयार किया जाएगा।

अवैध कनेक्शन वाले कनेक्शन करवाएं रेगुलर

एडीशनल कमिश्नर ऋषिपाल ने कहा कि जिन लोगों को लगता है कि उनके वाटर सीवरेज कनेक्शन अवैध हैं या फिर उनकी कैटागरी में फर्क है तो वह उसे तुरंत ठीक करवाएं और बकाया राशि निगम में जमा करवाएं। उसके साथ ही उनके कनेक्श रेगुलर करवा दिए जाएंगे। 31 जनवरी के बाद उनके कनेक्शन काटने व प्रॉपर्टी सील करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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