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-जापान व चीन से लाई विदेशी मशीनों से होगी ई-कचरे की री-साइकलिग

-स्परैको कंपनी के युवा वैज्ञानिक इंजीनियर अमनजोत सिंह ने कहा, हमारा मकसद सूबे में ई-कचरे से प्रदूषित हो रहे वातावरण को बचाना बिदु उप्पल, जगराओं

ई-कचरे का निपटारा वर्तमान में बड़ी चुनौती है। इनसे निकलने वाले द्रव्य, रसायन पानी, जमीन के अंदर के पानी, मिट्टी, हवा में मिल सकते हैं। इनके जरिए ये जानवरों व फसलों में प्रवेश कर सकते हैं जोकि बाद में मानव जीवन के लिए खतरा है। यह कहना है स्परैको कंपनी के युवा वैज्ञानिक इंजीनियर अमनजोत सिंह का।

दैनिक जागरण से बातचीत में इंजी. अमनजोत सिंह ने बताया कि देश को ई-कचरे से मुक्त करवाने के लिए उन्होंने चंडीगढ़ की पैक यूनिवर्सिटी से एमटैक इन ई-वेस्ट मैनेजमेंट की। फिर अपनी स्परैको कंपनी स्थापित की। ई-कचरा यानि इलेक्ट्रोनिक कचरा उपयोग में नहीं आने वाले बिजली या इलेक्ट्रोनिग का सामान है। इसमें कंप्यूटर, प्रिटर, मोबाइल फोन, टेलीफोन, टेलीविजन सेट, रेफ्रीजरेटर, वाशिग मशीन व लैपटॉप शामिल है। यह इलेक्ट्रोनिक सामान बड़े ही हानिकारक पदार्थो से बनते हैं, जैसे मरकरी, रसायन, क्रोमियम जैसे हानिकारक पदार्थ। यह सामान कबाड़िए इकट्ठा कर लेते हैं और उन्हें दिल्ली भेजते हैं। फिर दिल्ली से यूपी के मुरादाबाद में जाते हैं। मुरादाबाद में ई-कचरे का पहला प्लांट है जहां ई-कचरा री-साइकिल होता है। वहां पर इसका ट्रीटमेंट कैमिकलों के साथ होता है और कॉपर निकाला जाता है जिससे बहुत ही हानिकारक गैसे निकलती है जोकि वातावरण को प्रदूषित करती है और सेहत के लिए भी हानिकारक है।

अमनजोत ने बताया कि उन्होंने सरकार से मान्यता प्राप्त कर पंजाब के जिला लुधियाना के तहसील रायकोट के फोकल-प्वाइंट में पंजाब का पहला ई-इलेक्ट्रोनिक वेस्ट री-साइकिल प्लांट लगाया है जहां पर जापान व चीन से लाई विदेशी मशीनों से ई-कचरे की री-साइकलिग होती है। स्परैको कंपनी ने सूबे का ई-कचरा इकट्ठा करने के लिए एक एंडरायड एप स्परैको के नाम से लांच किया है जिसको बुधवार को इन्वारमेंट डायरेक्टर केएस पन्नू ने लांच किया है। उन्होंने बताया कि रायकोट में बने ई-कचरे री-साइकिल प्लांट में ई-वेस्ट को री-साइकिल किया जाएगा। उनका मकसद सूबे में ई-कचरे से प्रदूषित हो रहे वातावरण को बचाना है।

Posted By: Jagran

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