जागरण संवाददाता, लुधियाना : बैंकों में इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर लगातार ग्रोथ की जा रही है और अब उनकी वित्तिय स्थिति को बेहतर करने के लिए एनपीए को समाप्त करना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए पंजाब एंड सिंध बैंक की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। इस पर खास ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ एग्रीकल्चर और एमएसएमई पर फोकस किया जा रहा है। यह विचार बैंक के एमडी एवं सीईओ एस हरिशकर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर गोविंद एन डोंगरे ने प्रकट किए। वे शुक्रवार को लुधियाना में दस जोनों की रिव्यू बैठक लेने के लिए लुधियाना पहुंचे थे। ज्ञात हो कि इन दस जोनों में सात सौ ब्राच काम कर रहीं हैं। बैंक एमडी ने अभी दिसंबर में ही चार्ज संभाला है। ऐसे में रिव्यू करने के लिए वे देशभर के जोनल अधिकारियों के साथ मंथन बैठक कर रहे हैं। इसमें पिछले एक साल में लोन, खाते खोले जाने, एक्सपेंशन और एनपीए को कम करने को लेकर किए प्रयासों समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा एनपीए इंफ्रा सेक्टर के हुए हैं। इसके साथ ही दूसरे पायदान पर पावर सेक्टर है। इंडस्ट्री के एनपीए में सुधार हुआ है और कंपनियों की ओर से रिफंड दिए जा रहे हैं। बैंक ने पिछले नौ महीनों में सात सौ करोड़ के एनपीए की रिकवरी की है। बैंकों के मर्जर पर उन्होंने कहा कि लंबे भविष्य के लिए यह देश के लिए बेहतर है। वहीं पंजाब एंड सिंध बैंक के लिए उन्होंने कहा कि इस बैंक को 111 साल पूरे हो चुके हैं। डिजिटल के दौर में अब ग्रामीण खाताधारकों को अपग्रेड करने के लिए बैंक स्टाफ प्रयास कर रहा है।

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