लुधियाना [राजेश शर्मा]। संगरूर में हुए वैन हादसे के बाद भी न तो स्कूल प्रबंधन जाग रहा है और न ही वाहन चालक। शायद उनकी नींद किसी और हादसे का इंतजार कर रही है। महानगर में तमाम ऐसे स्कूल वाहन मिल जाएंगे, जिसमें सेफ वाहन पॉलिसी की गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाई जा रही है।

जिला प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस द्वारा नियमों की अनदेखी कर सड़क पर दौड़ाए जा रहे स्कूल वाहनों पर तीन दिन से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन उसका कोई असर नहीं दिख रहा। वीरवार को दैनिक जागरण की टीम ने स्कूल वाहनों का रियलिटी चेक किया तो ऐसे-ऐसे वाहन छात्रों को ले जाते दिखे जो कभी भी किसी बड़े हादसे को अंजाम दे सकते हैं। सात लोगों के बैठने की क्षमता वाली क्वालिस कार में 18 बच्चे सामान की तरह ठूस-ठूस कर बैठाए गए थे। नियम के तहत वाहन पीले रंग का भी होना चाहिए था। टीम लाइव रिपोर्ट करने शास्त्री नगर स्थित आरएस मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के बाहर पहुंची। गेट के बाहर पीबी 10 बीएफ 8743 नंबर की स्कूल बस दिखी, जिसकी नंबर प्लेट ही नहीं पढ़ी जा रही थी। अंदर जुगाडू सीटें तैयार की गई थीं। दोनों साइड के इंडीकेटर ही टूटे हुए थे। विंडो पर न ग्लास था और न ही जालियां। शायद हमारे कैमरे पर ड्राइवर की नजर पड़ गई हो वह बस के पास आया ही नहीं।

ड्राइवर सहित सात सीटो की केपेस्टी वाले इस वाहन में 18 बच्चे ठूस ठूस कर भरे हुए थे।

बच्चे कार से कभी सिर बाहर निकाल रहे थे तो कभी बाजू

स्कूल के बाहर ही पीबी 10 एफ ईएच 2707 नंबर की सफेद रंग की एक क्वालिस दिखी, जिसमें बच्चे ठूस ठूस कर भरे हुए थे। निकली तो हमने भी अपनी गाड़ी क्वालिस के पीछे लगा दी। तेज रफ्तार से दौड़ रही क्वालिस की विंडो से बच्चे कभी सिर बाहर निकाल रहे थे तो कभी बाजू। नियम के तहत विंडो पर ग्रिल व जाली लगी होनी चाहिए थी, लेकिन वहां कुछ भी नहीं था। वाहन में एक अटेंडेंट व एक लेडी अटेंडेंट होना आवश्यक है पर यहां तो ड्राइवर ने अगली सीट पर ही तीन बच्चे बैठा रखे थे। गाड़ी शास्त्री नगर, मॉडल टाउन एक्सटेंशन, दुगरी रोड, गिल कैनाल रोड, जवद्दी से होते हुए पंजाब माता नगर से पखोवाल रोड पर पहुंच गई। इस दौरान पुलिस का एक भी नाका नहीं दिखा। पखोवाल रोड पहुंचकर हमने ड्राइवर से फर्स्ट एड किट बाबत पूछा तो ड्राइवर बोला, वो क्या होता है। अग्निशमन यंत्र के सवाल पर भी यहीं जवाब था। वाहन की न तो इंश्योरेंस थी और ना ही प्रदूषण सर्टिफिकेट, ना ही गाड़ी मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर से पास करवाई गई थी। रोड टैक्स भी नहीं भरा था। दस्तावेज के नाम पर ड्राइवर के पास सिर्फ ड्राइविंग लाइसेंस व आरसी ही मिली।

वाहन की विंडों पर ग्रिल व जाली लगी होना अनिवार्य है जबकि इस क्वालिस के हालात कुछ ऐसे थे।

बड़ा सवाल

इतनी कड़ी चेकिंग के बावजूद ऐसे वाहन बच्चों को खुलेआम मुख्य सड़कों से ले जा रहे है। क्या प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस की नजर नहीं पड़ती।

जागरण अपील

दैनिक जागरण बच्चों के अभिभावकों से भी अपील करता है कि वह अपने बच्चों की सेफ्टी सुनिश्चित करें और सेफ वाहन पॉलिसी की गाइडलाइन पूरी करने वाले वाहनों में ही अपने बच्चों को भेजें।

सोमवार से होगी सख्त कार्रवाई : सेक्रेटरी आरटीए 

विभाग की पूरी टीम नियमों के विपरीत दौड़ रहे स्कूल वाहनों पर कार्रवाई के लिए जुटी है। आपने जो भी बताया हम उसी एंगल से सोमवार से सख्त कार्रवाई को अंजाम देंगे। हमारा प्रयास है कि शहर में कोई भी वाहन ऐसा न रहे जो सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी के अनुसार न हो।

दमनजीत सिंह मान, सेक्रेटरी रीजनल ट्रांसपोर्ट अथारिटी

31 स्कूल वाहनों के चालान 2 किए जब्त

सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी को लागू करवाने के लिए वीरवार को भी वाहनों की चेकिंग जारी रही। ट्रैफिक पुलिस, रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, एसडीएम द्वारा विभिन्न इलाकों में की गई कार्रवाई में 31 वाहनों के चालान काटे गए व 2 को जब्त किया गया। कार्यकारी डिप्टी कमिश्नर इकबाल सिंह संधू ने बताया कि 196 वाहनों की चेङ्क्षकग की गई थी, जिसमें से वायलेशन कर रहे 31 वाहनों के चालान काटे गए। सेक्रेटरी रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी दमनजीत सिंह मान ने बताया कि केवीएम, बीवीएम, सतपाल मित्तल स्कूल, डीएवी व सेक्रेड हार्ट स्कूल के वाहनों की चेकिंग हुई। इनमें से कुछ वाहन ऐसे थे जो लगभग सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी के अनुसार थे, लेकिन उनमें नाममात्र खामियां थीं। उन्होंने स्कूलों में तीन दिन के अवकाश का तर्क देते हुए इस दौरान यह खामियां दूर करने का भरोसा दिलवाया है। सोमवार से चेकिंग अभियान को और तेज करने की बात भी सेक्रेटरी आरटीए ने कही। 

Posted By: Vikas Kumar

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