कपूरथला, [हरनेक सिंह जैनपुरी]। जिले के गांव काला संघिया में स्थित बाबा नंद चंद मृतक देह संभाल घर (मोर्चरी) में रखी गई महिला की देह में पांच घंटे बाद प्राण लौट आए। महिला ने पानी पिया और फिर आंखें खोली। यह चमत्कार देखकर मोर्चरी के सेवादार ने महिला के परिवार वालों को फोन किया तो वह उसे सिविल अस्पताल ले गए। हालांकि एक दिन बाद बुधवार को महिला की फिर मौत हो गई और परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया।

पिम्स जालंधर में दाखिल थी गांव जल्लोवाल की महिला
पुलिस चौकी काला संघिया के इंचार्ज एएसआइ ठाकुर सिंह और बाबा नंद चंद मृतक देह संभाल घर के सेवादार गुरदीप सिंह ने बताया कि मंगलवार बाद दोपहर करीब ढाई बजे गांव जल्लोवाल निवासी 65 वर्षीय प्रवीण कुमारी ब्रह्म दत्त का शरीर परिजन मोर्चरी के फ्रीजर में रख गए। उन्होंने बताया कि प्रवीण कुमारी को कुछ दिन पहले जालंधर के पिम्स में दाखिल करवाया गया था, जहां उनकी मौत हो गई। परिजन शरीर को मोर्चरी के फ्रीजर में रख गए तो थोड़ी देर बाद उनको याद आया कि माता के गले में सोने की चेन थी, जिसे उतारा नहीं गया है। सोने की चेन के लिए परिवार वाले शाम को मोर्चरी आए।

गले में सोने की चेन याद आने पर खोली मोर्चरी तो सांसें चल रही थीं
मोर्चरी के सेवक गुरदीप सिंह ने शाम करीब सात बजे फ्रीजर खोला तो शरीर में हरकत हो रही थी और सांसें भी चल रही थीं। इसके बाद गुरदीप सिंह फ्रीजर का दरवाजा खोल दिया और माता को अपने हाथों से पानी पिलाया। उसने तुरंत परिजनों को बताया तो वे हैरान रह गए।

गुरदीप सिंह ने बताया कि महिला की आंखों पर लगाई पट्टी खोल दी गई तो उसने आंखें खोल लीं। करीब आठ बजे परिवार वाले महिला को सरकारी अस्पताल कपूरथला ले गए। हालांकि बाद में महिला की मौत हो गई और बुधवार को परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया।

सिविल अस्पताल में दाखिल करने के दौरान चल रही थी नब्ज : डॉ. परमिंदर
सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उक्त महिला को मंगलवार रात करीब सवा नौ बजे परिजन अस्पताल लेकर आए थे। उस समय मामूली नब्ज चल रही थी। ड्यूटी पर तैनात डॉ. परमिंदर सिंह ने कहा कि महिला की नब्ज चल रही और इसके बाद उसे ऑक्सीजन भी लगाई गई थी। बुधवार तड़के बिना बताए महिला को परिजन ले गए।

पिम्स में महिला को नहीं करवाया गया था दाखिल : अमित सिंह
उधर पिम्स जालंधर के रेजीडेंट डायरेक्टर अमित सिंह का कहना है कि उनके पास ऐसा कोई केस नहीं आया है। अस्पताल का स्टाफ ऐसे किसी मरीज को नहीं भेजता कि वह जीवित हो और उसे मृत घोषित कर दिया जाए। उन्होंने बताया कि पिम्स में बकायदा पूरी कार्रवाई के बाद ही शव को रिलीज किया जाता है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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