संवाद सहयोगी, कपूरथला : हर साल 26 जून को दुनिया भर में नशीली दवाओं के दुरुपयोग नशा तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया जाता है ताकि हम आने वाली पीढि़यों को नशे के खराब प्रभावों के बारे जागरुक कर सके। यह बात सिविल सर्जन डा. गुरिदरबीर कौर ने रविवार को सिविल अस्पताल में आयोजित समागम के दौरान कही। उन्होंने कहा कि कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसके महत्वपूर्ण प्रभाव के कारण मादक पदार्थों की तस्करी एक प्रमुख वैश्विक चिता है। नशा एक ऐसी बीमारी है जो युवाओं को अपनी चपेट में ले लेती है और कई तरह की बीमारियों का कारण बनती है। नशा नही मिलने पर युवा गलत राह पर चलने के लिए मजबूर हो जाते हैं। यह भी देखा गया है कि फुटपाथ और रेलवे प्लेटफार्म पर रहने वाले बच्चे भी आजकल नशे के आदी हो रहे हैं।

सिविल सर्जन डॉ. गुरिदरबीर कौर ने कहा कि महिलाएं नशे के मामले में भी पीछे नहीं हैं। व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में तनाव, प्रेम प्रसंग, विवाहित जीवन और तलाक आदि जैसी समस्याओं ने भी कई महिलाओं को नशे की लत लगने की अनुमति दी है।

डा. संदीप भोला ने कहा कि पंजाब सरकार ने युवाओं के लिए नशे की लत से बाहर निकलने और बेहतर और समृद्ध जीवन जीने के लिए कई अवसर पैदा किए हैं। युवाओं को इसका लाभ उठाना चाहिए और सिविल अस्पतालों के विशेषज्ञ डाक्टरों से इलाज कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि अकेले कपूरथला जिले में ही ओट्स क्लीनिक एवं पुनर्वास केंद्रों में उपचार कराकर हजारों युवा समृद्ध जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशा छोड़ने के लिए स्वेच्छाचारिता का होना जरूरी है और कोई भी युवा नशा मुक्त जीवन को खुशहाल जीवन में बदल सकता है। इस अवसर पर डिप्टी मास मीडिया आफसर शरणदीप सिंह और बीईई रविदर जस्सल ने भी अपने विचार रखे।

Edited By: Jagran