यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 30, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
किसान पराली के धुंए में उड़ा रहे सरकार के निर्देश
बेगोवाल नंगल लुबाणा मकसूदपुर और आसपास के गांवों के खेतों जल रहे सरकार के नियम

संवाद सहयोगी, सुभानपुर :
बेगोवाल, नंगल लुबाणा, मकसूदपुर और आसपास के गांवों के खेतों में आग लगाकर किसान ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों व सरकार की पाबंदियों का उल्लंघन कर रहे हैं। वहीं खेतों में पराली को लगाई गई आग से उठने वाले धुंए से पर्यावरण का नुकसान तो पहुंच ही रहा है, लोगों की सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है, खास कर सांस व फेफड़े से संबंधित मरीजों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं उठ रहे धुंए से यातायात भी प्रभावित हो रहा है। हालत ये हो जा रहे हैं कि दिन के समय लोगों को वाहनों की लाइट जलाकर चलना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि गांव बूलेवाल के एक किसान ने पिछले दिनों किसानों द्वारा लगाई आग के कारण 2.5 एकड़ धान जल गया था। आग की सूचना मिलने पर भुलत्थ पुलिस मौके पर पहुंच आग पर काबू पाया था। दूसरी ओर छह महीने से आग की घटनाओं पर कोई प्रतिक्रिया न होने के कारण किसान फसलों के अवशेषों को आग के हवाले कर रहे हैं।
जबकि प्रशासन द्वारा किसानों को पराली के निपटारे के लिए कृषि उपकरण भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। फिर भी आग लगाने का काम जारी है। दूसरी ओर सरकार द्वारा टीमों को गठित कर उपग्रह के माध्यम से पहचान करने व कार्यवाई करने का दावे कागजी साबित हो रहे हैं।
