संवाद सहयोगी, सुल्तानपुर लोधी : 550वें प्रकाशोत्सव के मद्देनजर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को जैसे वशिष्ठ व्यक्तियों की सुरक्षा प्रबंधों के लिए सड़कों किनारे पेड़ों की कटाई की गई। इसके पश्चात अब गुरुद्वारा बेर साहिब सुल्तानपुर लोधी के पीछे बहती श्री गुरु नानक देव जी के चरण स्पर्श प्राप्त पवित्र काली बेई नदी के किनारे लगभग 16 साल पुराने पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है। वन विभाग के अनुसार केवल पेड़ों की छंटाई की जा रही है, लेकिन जिस तरह से पेड़ों की बड़ी-बड़ी शाखाओं को काटा जा रहा है, उससे उनके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।

विश्व विख्यात पर्यावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से लाइव करते हुए व्यंग्य से उक्त पेड़ों के कटाव का तीव्र विरोध दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि 16 साल पूर्व बेई नदी के तट पर लगाए गए पेड़ों को वन विभाग बहुत क्रूरता से काट रहा है। उन्होंने कहा कि पहले विभाग ने सड़कों किनारे से पेड़ों को काट दिया और अब बेई नदी के किनारे से पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो नए पेड़ लगाने की बात कह रही है और दूसरी तरफ वन विभाग पेड़ों को काट रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो विभाग बेईं नदी की सेवा के दौरान लगाए गए पेड़ों को कभी पानी लगाने या संरक्षण करने के लिए आगे नहीं आया, वह अब आरी के साथ उन्हें काटने के लिए पहुंच गया है। संत सीचेवाल ने कहा कि यह सब जानबूझकर और जबरदस्ती किया जा रहा है।

पेड़ नहीं काटे, केवल छंटाई की : राजेश गुलाटी

जिला वन अधिकारी राजेश गुलाटी ने कहा कि कोई पेड़ नहीं काटा गया। केवल शाखाओं को छांटा गया है, ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की सुरक्षा के मद्देनजर इन पेड़ों को छांटने का आदेश दिया गया है। वहीं, कपूरथला के जिलाधीश दविदरपाल सिंह खरबंदा ने कहा कि सड़कों या बेई नदी के किनारे पर कोई पेड़ नहीं काटा गया हैं। अगर कोई पेड़ काटता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सुरक्षा कारणों के चलते कुछ पेड़ों की शाखाओं को अवश्य छांटा गया है। उधर, पर्यावरण प्रेमी डॉ. निर्मल सिंह लांबड़ा ने कहा कि सरकारें हमेशा से पेड़ों के साथ जबरदस्ती करती आ रहीं हैं और विशेष रूप से सरकार ने प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट करने के लिए एक तरह से 'अनुबंध' लिया है। डॉ. लांबड़ा ने कहा कि संत बलबीर सिंह मध्ययुगीन खुद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य हैं और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उन्हें पंजाब की नदियों में गंदगी की जांच के लिए निगरानी समिति का सदस्य भी बनाया है। केंद्र सरकार उन्हें पद्मश्री से सम्मानित कर चुकी है। अगर पंजाब सरकार पर्यावरण को बचाने वाली ऐसी महान हस्तियों के साथ भी धक्केशाही कर रही है। फिर, आम जनता को कहां सुना जा सकता है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!