नरेश कद, कपूरथला : शहर के मेडिकल स्टोर्स पर ऐसी दवाओं की कथित तौर पर बिक्री पिछले कुछ समय से अचानक बढ़ गई हैं, जिनकी डोज जानलेवा साबित होती हैं। दवा दुकानों इन दवाओं को बेधड़क बगैर किसी रोक-टोक के बेचा जा रहा हैं, जबकि इनमें से कुछ प्रतिबंधित दवाएं हैं। इन दवाओं के असर और अचानक बढ़ी बिक्री को लेकर विभाग या तो पूरी बेखबर हैं या जिला स्वास्थ्य फिर जानबूझ कर बेखबर बन रहा हैं। इसके साथ ही दवाओं की बिक्री पर अकुंश लगाने के लिए शहर में ऐसी कोई कमेटी नहीं बनाई गई हैं, जो इनका परीक्षण कर सके।

आमतौर पर कई मरीज डॉक्टरी सलाह के बगैर सीधे मेडिकल स्टोर से पेनकिलर सहित अन्य ऐसी दवाएं खरीद कर रख रहे हैं, लेकिन ये दवाएं उनके लीवर किडनी व अन्य अंगों को हानि पहुंचा सकती हैं। इनमें ऐसी भी दवाएं हैं, जो नकली साबित हो रही हैं। इनके सेवन से मरीज ठीक होने के बजाए और अधिक गंभीर बीमार हो रहे हैं। शहर की अधिकतर दवा दुकानों पर कथित तौर पर नकली दवाओं का धंधा भी जोरों से जारी हैं। बिना डाक्टरी पर्ची के दवाएं बिकना तो सामान्य बात हो गई हैं। इसके साथ ही बनी लाइसेंसी दवाएं मेडिकल स्टोर्स पर कथित तौर पर आसानी से मिल जाती हैं।

दुकानों पर दिखावे की कार्रवाई करता है औषधि प्रशासन

इन दुकानों पर कभी-कभी खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग दिखावे की कार्रवाई करता है, लेकिन अब भी ऐसी तमाम दुकाने हैं, जहां पर कथित तौर पर नकली व खतरनाक दवाओं का धंधा खुलेआम चल रहा हैं। बावजूद इसके कि इन दवाओं पर साफ तौर लिखा होता हैं कि डॉक्टरी सलाह के बाद ही दवा सेवन करे। पैसे कमाने के चक्कर में शहर व गांवों में जगह-जगह बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर खोल कर लोगों को नकली व नशीले दवाएं भी बेच रहे हैं। जिनके खिलाफ सेहत विभाग की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जाती। कुछ लोग मेडिकल स्टोरों पर दो-दो महीने काम व काम-चलाऊ ट्रेनिग हासिल करने के बाद अपना मेडिकल स्टोर खोल लेते हैं, जिन्हें ना तो दवाओं के बारे में अच्छे से जानकारी होती हैं और पैसे कमाने की आड़ में लोगों को महंगे दामों पर दवाई बेचते हैं।

ऐसे चलता हैं कारोबार

जिले और आसपास के कस्बों में स्थित दवा दुकानों में दवा कंपनियों द्वारा कथित तौर पर दवाओं की सीधी सप्लाई की जा रही हैं। भरपूर कमिशन देने के आश्वासन मात्र पर इन दवाओं की बिक्री हो रही हैं। मरीज एवं उनक परिजनों को इसकी कोई जानकारी नहीं रहती हैं कि जो दवाएं उन्हें दी जा रही हैं, वह उन्हें क्या नुकसान पहुंचाएगी।

यह हैं ड्रग एक्ट

ड्रग एक्ट के तहत किसी भी दवा दुकान से बिना मान्यता प्राप्त डॉक्टर के पर्चे के दवाएं रोगी को नहीं बेची जा सकती हैं। प्रत्येक दवा स्टोर में फार्मासिस्ट ही दवाएं विक्री करेंगे। उनके अलावा कोई दवाओं का वितरण नहीं करेगा।

इन खतरनाक दवाओं की हो रही बिक्री

लैट्राजोल-बांझपन, निमुसलाइड-दर्द निर्वाक, डायक्लोबिन-बुखार, फिनाइल प्रोपनोलापीन-खांसी, गेटीक्लाकसासिन-एंटीबाईटिक, सिजाप्राईड-एसिडिटी के लिए, क्यूजोलिडान-केंसर का खतरा, पयोगिलटाजोन- डायबिटीज के लिए, आईब्रोफेन-दर्द निवारक ( गेस्ट्रील अन्सर होने की संभावना), रेनिटिडिन-पाक से प्रतिबंधित, नाइट्रोक्यूटाजाग-कैंसर का खतरा, पियेराजाइन-तांत्रिका रोग का खतरा, क्यीनीचोयेकेलार-नेत्र संबंधी रोगो का खतरा। इस तरह की ओर भी कई खतरनाक दवाओं की बिक्री धड़ल्ले से हो रही हैं।

बिना पर्ची के बेची जाती हैं दवाएं

इस मामले की पड़ताल की गई तो चौंकने वाले तथ्य सामने आए हैं। आमतौर पर सामान्य बीमारियों के लिए जिन दवाओं को घरेलू माना जाता हैं और जिनके सेवन के लिए डॉक्टर की सलाह की आवश्यकता होती हैं। ऐसी दवाएं मेडिकल स्टोर्स पर कथित तौर पर बना डॉक्टर पर्ची उपलब्ध हो जाती हैं। ऐसी सैंकडों दवाएं हैं, जो बिना पर्ची के ग्राहकों को मेडिकल स्टोर्स पर मिल जाती हैं, जो खतरनाक साईडइफेक्ट वाली होती हैं।

कोट्स

विभाग की तरफ से इस सिलसिले में विशेष मुहिम चलाई जाएगी और जिले में प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री करने वालों साथ सख्ती से निपटा जाएगा। मौने केमिस्टों को सख्त चेतावनी देते हुए कानून के दायरे में काम करने की हिदायत की है।

रीटा बाला, एसएमओ

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Posted By: Jagran