संवाद सहयोगी, फगवाड़ा : कोविड-19 आपदा में दो महीने से बंद चल रहे निजी स्कूल प्रबंधकों की ओर से छात्रों को वाट्सएप से होमवर्क भेजने अथवा ऑनलाइन क्लास शुरू करने के बाद अब फीस जमा करवाने के लिए कहा जा रहा है जिससे बच्चों के अभिभावक परेशान हैं। लॉकडाउन में कारोबार बंद होने के चलते हो रहे आर्थिक नुकसान के बीच भारी भरकम फीस देना उन्हें मुश्किल लग रहा है। अभिभावकों का मत है कि जब स्कूल खुला ही नहीं तो फीस और ट्रासपोर्ट का खर्च मांगना बेइमानी है। वहीं, दूसरी तरफ स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि उन पर स्कूल के खर्च और अध्यापकों व स्टाफ को वेतन आदि का भुगतान करने का दबाव है जिसकी अदायगी के लिये फीस वसूलना उनकी भी विवशता है।

स्कूल प्रबंधकों तथा अभिभावकों में चली आ रही खींचतान का संज्ञान लेते हुए शनिवार को विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल (रिटायर्ड आइएएस ) की पहल पर एसडीएम गुरविंदर सिंह जौहल ने शहर के प्रमुख निजी स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने सभी स्कूलों को सख्त हिदायत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से निजी स्कूलों के लिए कोरोना आपदा में जो नियम जारी किए गए हैं उनका पालन हो। किसी भी अभिभावक से ट्यूशन फीस के अलावा री-एडमिशन फीस, ट्रासपोर्ट अथवा किसी अन्य प्रकार का खर्च न मागा जाए। यदि किसी स्कूल ने अभिभावकों पर फीस वसूली के लिए जबरन दबाव बनाया तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल ने भी निजी स्कूल प्रबंधकों से अपील कर कहा कि यह समय एक दूसरे सहयोग करने का है। इसलिए उन्हें लोगों की विवशता समझनी चाहिए और नैतिक तथा समाजिक क‌र्त्वय निभाते हुए फीस में राहत देनी चाहिए। विधायक धालीवाल ने कहा कि स्कूल प्रबंधकों को आवश्यक निर्देश एसडीएम जौहल की ओर से दे दिये गए हैं। कोई भी स्कूल मनमानी नहीं करेगा। उन्होंने फगवाड़ा वासियों को आश्वस्त किया कि उन्हें अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। जनता से जुड़े हितों की रक्षा के लिये वे वचनबद्ध हैं। इस अवसर पर मार्केट कमेटी फगवाड़ा के चेयरमैन नरेश भारद्वाज, समाजसेवी विनोद वरमानी व पूर्व प्रधान गुरजीत पाल वालिया भी उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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