संवाद सहयोगी, फगवाड़ा : देश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ दिनों से कोरोना के केस बढ़ रहे हैं। देश में अभी छोटे बच्चों का वैक्सीनेशन नहीं हो रहा है ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर के बीच बच्चों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। फगवाड़ा के प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डा. विजय शर्मा कहते है कि बच्चों को कोरोना से सुरक्षित रखने में माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कोविड-19 के साथ अन्य मौसमी बीमारियों का भी दौर चल रहा है। डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया के साथ-साथ मौसमी फ्लू के लक्षण भी कोरोना संक्रमण से मिलते जुलते होते हैं। ऐसे में इन लक्षणों को समझना हर माता-पिता के लिए आवश्यक है। यदि बच्चे को बुखार है तो यह जरूर नहीं है कि वह कोरोना से ही संक्रमित हो। बच्चों में कोरोना के लक्षणों में स्वाद-गंध न आने की समस्या भी कम ही होती है। ऐसे में इस बारे में डाक्टर से सलाह जरूर ले लें। डा. विजय शर्मा ने कहा कि बच्चों में कोरोना के गंभीर लक्षणों का खतरा कम होता है। सामान्य तौर पर बंद नाक, शरीर-मांसपेशियों में दर्द, छींक-खांसी आने के साथ बुखार के लक्षण बच्चों में देखे जा सकते हैं, हालांकि मानसून के मौसम में सिर्फ ऐसे लक्षणों के आधार पर ही कोरोना की पुष्टि नहीं का जा सकती है। कुछ रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि संक्रमित बच्चों और किशोरों में कोविड के लक्षण हो सकते हैं। हालांकि यह ज्यादा सामान्य नहीं है। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं तो डाक्टर की सलाह पर कोरोना की जांच करा लें। डा. विजय शर्मा ने कहा कि यदि बच्चे का कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पाजिटिव आता है तो उसे स्कूल बिल्कुल न भेजें। घबराएं नहीं और परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच करा लें। बच्चों को हाइड्रेटेड रखने के लिए तरल पदार्थ देते रहें और पर्याप्त आराम करने दें। डाक्टर की सलाह के आधार पर ही दवाइयों को प्रयोग में लाएं।

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