हरनेक सिंह जैनपुरी, कपूरथला। देश के नागरिक अब ‘जल ही जीवन’ की सत्यता को स्वीकार करने के साथ ही पानी को संरक्षित करने की दिशा में भी काम करने लगे हैं। इस दिशा में पंजाब के कपूरथला में भी एक अच्छी पहल हुई है। यहां छप्पड़ (गंदे पानी का तालाब) का सदुपयोग कर जल संरक्षण किया जा रहा है। कपूरथला के गांव सिधवां दोनां में छप्पड़ को सजा-संवार कर एक मिसाल बना दिया गया है। सीवरेज और नालियों का गंदा पानी ट्रीट कर छप्पड़ के माध्यम से खेतों में इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही, आधे छप्पड़ में पार्क बना दिया गया है। उसमें कबड्डी व बैडमिंटन के मैदान बनाए गए हैं। लोग छप्पड़ में बोटिंग का लुत्फ भी लेते हैं। गांव सिधवां दोनां ही नहीं, आसपास के गांव के लोग भी सुबह-शाम यहां सैर करने के लिए आते हैं।

पहले आती थी बदबू, मच्छरों से जीना था मुहाल
इस छप्पड़ में पहले गांव के सीवरेज व नालियों का गंदा पानी जाता था। बदहाली से घिरा छप्पड़ बदबू व मच्छर की फैक्ट्री बना हुआ था। गांव की पूर्व सरपंच कमलजीत कौर, उनके पति कबड्डी के अंतरारष्ट्रीय खिलाड़ी सुखविंदर सिंह नेकी और उनकी युवा टीम ने इस छप्पड़ को संवार दिया।

गांव की विकास कमेटी के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह नेकी बताते हैं कि छप्पड़ को सवारने में करीब 17-18 लाख रुपये लगे। इसमें सरकार का एक भी पैसा नहीं लगा। एनआरआइ और गांव वासियों के सहयोग से यह कार्य किया गया है। वह बताते हैं कि पूरे गांव में अंडर ग्राउड सीवरेज डाला गया है। यहां बनाए गए देसी ट्रीटमेंट प्लांट में पाइप लाइनों के जरिये गांव के सीवरेज का गंदा पानी पहुंचता है। इसे देसी तकनीक से ट्रीट कर नए बनाए गए तालाब में एकत्रित किया जाता है। बीस हार्सपावर मोटर के जरिये, इसे सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पंचायत की करीब 28 एकड़ जमीन पर इस छप्पड़ के पानी से खेती हो रही है।

बारिश का पानी रीचार्ज करने के लिए अलग कुआं खोदा
सुखविंदर बताते हैं कि बारिश के पानी को रीचार्ज करने के लिए अलग से 70 फीट चौड़ा कुआं खोदा गया है। बरसात के दिनों में यह कु एं जल रीचार्ज का काम करता है। तालाब के मुख्य द्वार के कुछ भाग में बैडमिंटन मैदान बनाया गया है। बुर्जुगों व अन्य लोगों के बैठने के लिए एक बड़ा चबूतरा बनाकर चौपाल का रूप दिया गया है। छप्पड़ को सजाने के लिए मालेरकोटला की नर्सरी से लाकर विभिन्न किस्म के पौधे लगाए गए हैं।

गांव के लोगों ने कायम की नई मिसाल
पर्यावरण प्रेमी एएसआइ गुरबचन सिंह बताते हैं कि तालाब के चारों तरफ सैरगाह बना कर उसे विभिन्न किस्म के फूलों से महकाया गया है। इसकी आसपास के गांवों में कोई मिसाल नहीं मिलती। इस संबंध में एडीसी राहुल चाबा कहते हैं कि सिधवा दोनां के लोगों ने वास्तव में एक नई मिसाल कायम की है। अन्य गांवों की पंचायतों को भी छप्पड़ों को संवारने के लिए आगे आना चाहिए।

Posted By: Sanjay Pokhriyal