कपूरथला, [हरनेक सिंह जैनपुरी]। भारतीय रेल का तेजस अब एक और तूफानी गति वाले सफर के लिए तैयार है। रेल डिब्बा कारखाना कपूरथला (आरसीएफ) 200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाली हाईस्पीड ट्रेन के 19 कोचों को तैयार कर रहा है। इन कोचों के तीसरे रैक को गांधी जयंती पर रवाना किया जाएगा। ये कोच जर्मन की लिंक हॉफमेन बुश (एलएचबी) तकनीक पर आधारित हैं। हाईस्पीड के बाद भी इसके अंदर बैठे यात्री को ट्रेन की गति का अहसास नहीं होगा। इसके साथ या‍त्रियों की हरकतों के कारण इसमें से एक सुविधा हटा दी गई है।

इन कोचों में अब हर सीट के पीछे एलईडी टीवी नहीं लगेगा। यात्रियों को एक-एक चिप दी जाएगी। इस चिप के जरिये वह अपने मोबाइल पर अपनी मर्जी के मूवी, नाटक, ड्रामे व खेल गतिविधियों का लुत्फ उठा सकेंगे। आरसीएफ प्रबंधन इससे पहले दो रैक भारतीय रेलवे को दो चुका है। पहला रैक मुंबई व गोवा और दूसरा चंडीगढ़ दिल्ली के बीच चल रहा है। ट्रैक अपग्रेड न होने की वजह से यह ट्रेन अभी तक दो सौ किलोमीटर की स्पीड नहीं पकड़ सकी हैं।

तेजस नामक इस हाई स्पीड ट्रेन के पहले दोनों रैकों में यात्री प्रत्येक सीट के पीछे लगी एलईडी स्क्रीन पर विभिन्न मनोरंजक कार्यक्रम व खेल गतिविधियों का आनंद उठाते रहे हैं। अनेक स्थानों पर एलईडी चोरी होने की घटनाओं के बाद अब एलईडी को हटा दिया गया है। अब हर कोच में एक चिप के जरिये यात्रियों के मोबाइल पर ही टीवी व मूवी की सुविधा मुहैया करवाई जाएगी।

हाईस्पीड वाईफाई इंटरनेट

इस ट्रेन में यात्रियों को हाईस्पीड वाईफाई इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। हर कोच में लगे सीसीटीवी कैमरे पूरे कोच की निगरानी करेगे। आरसीएफ के महाप्रबंधक सत्यप्रकाश त्रिवेदी ने बताया कि रेडिका हाईस्पीड ट्रेन के 19 कोचों का एक रैक तैयार कर रहा है। इसे गांधी जयंती पर मुकम्मल कर लिया जाएगा।

हर कोच में 6 सीसीटीवी कैमरे

जीएम त्रिवेदी ने बताया कि हर कोच में 6-6 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इन पर नजर रखने के लिए दिल्ली में कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। चार कैमरे कोच के अंदर और दो कैमरे दोनों दरवाजों पर लगे हैं। कोच के दरवाजे भी पूरी तरह ऑटोमैटिक हैं। पांच किलोमीटर की स्पीड पकड़ते ही खुद-ब-खुद बंद हो जाएंगे।

सीटों पर पढ़ने के लिए एलईडी लाइट की व्यवस्था की गई है। इससे पास वाले यात्री को कोई परेशानी नहीं होगी। इनके अलावा हर सीट पर कॉल बेल भी लगी होगी, जिससे आप अटेंडेंट को बुला सकते हैं। बेल बजाने पर सीट पर लाइट जलेगी, जिससे पैंट्री में पता चल जाएगा कि कॉल किस सीट से आई है।

जीपीएस सिस्टम से लैस

जीएम त्रिवेदी ने बताया कि ट्रेन जीपीएस सिस्टम में भी लैस होगी।  हर यात्री सीट पर बैठे अपनी स्क्रीन पर हवाई जहाज की तरह जानकारी ले सकेंगे। वे ट्रेन कितनी देर में पहुंचेगी, कितनी लेट चल रही है और कौन सा स्टेशन कितनी देर में आएगा, आदि जानकारी देख सकेंगे।

एक कोच की लागात साढ़े तीन करोड़

कोच में आधुनिक इलेक्ट्रोनोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम लगा है। इसमें स्टील की ब्रेक डिस्क एवं सिनटर्ड पैड होंगे। इस सिस्टम के जरिये ट्रेन को 200 किलोमीटर प्रति घंटा की हाईस्पीड होने के बावजूद जरूरत पड़ने पर निर्धारित 1400 मीटर के भीतर आसानी से रोका जा सकेगा। एक कोच पर 3.50 करोड़ रुपये की लागत आई है।

हर सीट के साथ लैपटॉप व मोबाइल चार्जिंग की सुविधा

आरसीएफ के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुनील कपूर ने बताया कि प्रत्येक सीट के साथ लैपटॉप व मोबाइल चार्जिंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा हर कोच में डस्टबिन भी होगा। ट्रेन की टॉयलट व टॉयलेट के बाहर बची जगह पर डस्टबिन लगाए गए हैं, ताकि डिब्बे में सफाई रहे।

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Posted By: Kamlesh Bhatt