जालंधर, जेएनएन। अगर आप सिम कार्ड लेकर 3-4 महीने तक उसको इस्तेमाल नहीं करते है तो वह नंबर किसी और को मिल सकता है। इसके बाद उस नंबर से जुड़े आपके बैंक खाते, ऑनलाइन वॉलेट समेत बाकी महत्वपूर्ण चीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। कुछ यही अनुभव साझा किया है कपूरथला के सीए गोपाल सुबेदी ने। उन्होंने शहर के फेसबुक ग्रुप ‘नोटिसबोर्ड - जालंधर’ पर आपबीती बताते हुए लोगों को सतर्क किया है।

गोपाल ने लिखा कि उनके व उनकी पत्नी के पास डबल सिम वाले मोबाइल थे। पत्नी के नाम पर दो अलग-अलग बैंकों में खाते थे। दोनों मोबाइल नंबर एक-एक खाते के साथ रजिस्टर्ड थे। एक दिन पत्नी का मोबाइल फोन टूट गया और फिर वो सिंगल सिम वाला मोबाइल खरीद लाए। जिसमें एक सिम इस्तेमाल कर लिया, जबकि दूसरा वैसे ही पड़ा रह गया।

तीन-चार महीने बाद वह बिजनेस टूर पर दिल्ली गए थे, जहां अचानक फंड की जरूरत पड़ी। पत्नी को फंड ट्रांसफर करने को कहा, लेकिन पत्नी ने कहा कि वो ट्रांसफर नहीं कर पा रही क्योंकि उसके पास ओटीपी नहीं आ रहा। उन्होंने दोस्त से पैसों का बंदोबस्त किया। एक दिन वह व्हाट्सएप पर मैसेज पढ़ रहे थे तो देखा कि उनकी पत्नी वाले नंबर पर किसी और की फोटो लगी थी।

तब उन्हें समझ आया कि उनके पास मौजूद सिम अब उनका नहीं रहा। उसे कोई दूसरा इस्तेमाल कर रहा है। तब मैंने 100 रुपये ट्रांसफर करने की कोशिश की लेकिन मेरे पास ओटीपी नहीं आया। मैंने उस नंबर पर फोन किया तो राजस्थान के बस ड्राइवर ने फोन उठाया।

जब मैंने मैसेज के बारे में पूछा तो उसने कहा कि उसके पास ओटीपी मैसेज आए हैं। उसने ये भी कहा कि उसके पास एक नंबर से नियमित तौर पर मैसेज व फोटो आ रही हैं लेकिन वो उन्हें नजरअंदाज करता रहा। मैंने अपना फोन चेक किया तो देखा कि वो मैसेज, फोटो व कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं उन्होंने ही पत्नी को भेजी थीं, लेकिन उसे कोई दूसरा आदमी प्राप्त कर रहा था। अगले दिन मैंने तुरंत बैंक में फोन किया और खाते से लिंक नंबर को बदलवाया। वो नंबर गैस एजेंसी व दूसरी महत्वपूर्ण जगहों पर भी दिया गया था। इसलिए उसे तुरंत बदलवाया गया।

यह मिली सीख

गोपाल ने लिखा कि मोबाइल कंपनियों के प्लान के हिसाब से हम सिम बदलते रहते हैं और यह नंबर कई मोबाइल एप्स व विभागों के साथ रजिस्टर्ड रहते हैं। अगर आप 4-5 महीने के लिए इस सिम को इस्तेमाल या रिचार्ज नहीं कराते तो मोबाइल कंपनियां किसी दूसरे को इसे इश्यू कर देती हैं। उन्होंने कहा कि जिस ड्राइवर को उनके नंबर का सिम मिला था, वह ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था या फिर ईमानदार था। उसने उनके ओटीपी का इस्तेमाल नहीं किया, वरना अपराधी इसे साइबर क्राइम के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

'' अगर किसी वजह से आप बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर का इस्तेमाल नहीं कर रहे या वो गुम हो गया तो तुरंत बैंक में उसे बदलवा लें क्योंकि बैंक से ऑनलाइन लेन-देन के वक्त इसी नंबर पर आए ओटीपी के जरिए ही अदायगी संभव हो पाती है। वो नंबर किसी दूसरे के हाथ लग जाए तो फिर वो ओटीपी का दुरुपयोग कर आपको नुकसान पहुंचा सकता है। बैंक खाते से वही नंबर जोड़ें, जो आपका परमानेंट नंबर हो या जो नंबर जुड़ा है, उसे परमानेंट इस्तेमाल करते रहें।

                                                                               -अमृतलाल, पूर्व असिस्टेंट मैनेजर, बैंक ऑफ बड़ौदा।

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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