नरेश भनोट. बटाला : पंजाब प्रांत के बटाला शहर में मनाया जाने वाला ऐतिहासिक पर्व बाबे दा व्याह सदियों से आपसी भाईचारे सौंदर्य तथा एकता का प्रतीक रहा है। इस बार संगत की तरफ से प्रथम पातशाही श्री गुरु नानक देव जी का 534वां वार्षिक विवाह पर्व मनाया जा रहा है। इसको मनाने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा पूरे प्रबंध किए जा रहे हैं, ताकि विश्व स्तरीय इस पर्व को मनाने में कोई कमी पेशी न रह जाए। जब विवाह पर्व पर नगर कीर्तन रूपी बारात निकलती है, तो आदर स्वरूप एसएसपी आफिस के बाहर पुलिस की एक टुकड़ी द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब और पांच प्यारों को सलामी दी जाती है। मगर अंग्रेजी हुकूमत के समय एक बार ऐसा समय भी आया, जब विवाह पर्व की अगुआई कर रहे पांच प्यारों को हाथों में नंगी कृपाण पकड़े होने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया था।

पांच प्यारों की गिरफ्तारी का वाक्य 1926 का

आजादी से पहले अंग्रेजी हुकूमत ने 1926 में पूरे भारतवर्ष में कृपाण पर पाबंदी लगा दी थी। इसके विरोध में अकालियों ने पंजाब में मोर्चा लगा दिया। उस समय बाबे के विवाह पर्व में शामिल होने के लिए अमृतसर से रेलगाड़ी से सैकड़ों श्रद्धालु बटाला पहुंचते थे। स्टेशन से ही श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया और पांच प्यारों की अगुआई में बारात रूपी नगर कीर्तन निकलता था। जो रेलवे रोड, जीटी रोड, गांधी चौक से होता हुआ गुरुद्वारा साहिब श्री डेरा साहिब जगत माता सुलखणी देवी के घर पहुंचता था। 1926 में वार्षिक विवाह पर्व पर ज्ञानी आत्मा ¨सह, संत बक्शीश ¨सह, जत्थेदार हरनाम ¨सह, स्वर्ण ¨सह, ग्रंथी गुरुद्वारा साहिब ¨सह सभा सिनेमा रोड तथा बलवंत ¨सह पांच प्यारों के वेश में बारात की अगुआई कर रहे थे। परंपरा अनुसार इन सभी पांच प्यारों ने हाथों में नंगी कृपाण पकड़ी हुई थी। अंग्रेजी हुकूमत को जब इस घटना के बारे पता चला तो अंग्रेज पुलिस पांच प्यारों को पकड़ने के लिए रास्ते में डट गई। इसका बारातियों ने जबरदस्त विरोध किया, लेकिन बारात के गुरुद्वारा साहिब श्री डेरा साहब में पहुंचने पर इन सभी पांच प्यारों ने अंग्रेज पुलिस को अपनी गिरफ्तारी दे दी। इसी बीच उस समय के नामवर शहर वासी गुरदित ¨सह ने इन पांच प्यारों से जमानत के लिए अपील की तो सभी ने अंग्रेजी हकूमत के आगे घुटने टेकने से मना कर दिया। लगभग एक महीने जेल में रहने के बाद इन पांच प्यारों को रिहा कर दिया गया।

सालाना विवाह पर्व शहर की शोभा देखने लायक होती है

इस वार्षिक विवाह पर शहर की शोभा देखने लायक होती है। हजारों की संख्या में घोड़ों पर गुरु साहिब की लाडली फौज निहंग ¨सह पहुंचते हैं। वह घोड़ों पर सवार होकर नगाड़े बजाते हुए आंखों पर पट्टी बांधकर गतका खेलते हैं। घोड़ों पर सवार होकर विभिन्न प्रकार के करतब दिखाते हैं। इससे अलग ही लोक की अनुभूति होती है। नगर कीर्तन के अंतिम शोर पर जब सेहरों तथा सुगंधित फूल मालाओं से सजे श्री गुरु ग्रंथ साहिब पालकी स्वरूप में नजर आते हैं, तो ऐसा महसूस होता है जैसे जगतगुरु श्री गुरु नानक देव साहिब सेहरा बांधकर अपने परिवारिक सदस्यों के साथ जगत माता सुलखनी देवी को बिहाने जा रहे हों। इस बार यह वार्षिक पर 13 सितंबर सोमवार को मनाया जा रहा है। इसमें देश विदेश से लाखों की संख्या में लोग सम्मिलित होंगे।