जालंधर, जेएनएन। सिविल अस्पताल में स्टाफ की लापरवाही के मामले थम नहीं रहे है। वीरवार दोपहर को सिविल अस्पताल से दो संदिग्ध मरीज अचानक गायब हो गए। गायब हुए मरीजों को अगर कोरोना हुआ तो वो शहरवासियों के लिए खतरनाक साबित होंगे। अस्पताल प्रशासन बात एंबुलेंस वालों पर डाल कर मामला छिपाने का प्रयास कर रहा है। हालांकि मरीज गायब होने से स्टाफ में अफरा-तफरी का माहौल है। सिविल अस्पताल के एसएमओ तथा एमएस ने कहा कि कोरोना के मरीजों की संख्या पूरी है, दूसरा कोई मरीज अस्पताल से गया है तो उसे ढूंढ़ कर दोबारा लाया जाएगा।

वीरवार को संजय गांधी नगर इलाके का करीब 30 साल के मरीज को फील्ड की टीम सिविल अस्पताल में लेकर आई। मरीज की फाइल बनी और मरीज वार्ड में पहुंचने से पहले ही गायब हो गया। वहीं, वीरवार को सुबह बस्ती बावा खेल इलाके के करीब 24 साल का एक मरीज सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया। मरीज वार्ड में पहुंचा और दोपहर को गायब हो गया।

तीसरी बार सिविल से मरीज गायब

सेहत विभाग की कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के चलते तीसरी बार सिविल अस्पताल से मरीज भागने का हादसा हुआ है। पहले कोरोना की मरीज भिखारन और उसके बाद शाहकोट का संदिग्ध मरीज अस्पताल से गायब हुआ था। इसके बाद वीरवार को जांच पड़ताल के लिए लाए गए दो मरीज अस्पताल से फुर्र हो गए। संदिग्ध मरीज सैंपल देने से पहले ही मौके का फायदा उठा कर भाग निकले।

सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. हरिंदर पाल सिंह का कहना है कि मामला गंभीर है। अगर भागे हैं तो संबंधित विभाग को सूचित कर उन्हें ढूंढ़ कर दोबारा लाया जाएगा। एसएमओ डॉ. कश्मीरी लाल का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या वार्ड में पूरी है। फ्लू कार्नर से जो मरीज भागा था उसे पकड़ लिया है। इमरजेंसी एंबुलेंस 108 के प्रभारी कमलजीत सिंह का कहना है कि एंबुलेंस की टीम मरीज की पर्ची के साथ इमरजेंसी व फ्लू कार्नर में तैनात डॉाक्टर के हवाले कर जाते हैं। इसके बाद वहां से मरीजों का गायब होना अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान है। 

 

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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